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स्टोन क्रेशर और अवैध पत्थर खदानों पर अंकुश नहीं
December 8, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • देश विदेश


शहडोल । रिहायशी क्षेत्रों के आसपास लगे स्टोन क्रेशर से उड़ रही धूल जिले के निवासियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। वहीं क्रेशर संचालकों के द्वारा पत्थर निकालने के लिये किये जा रहे धमाकों से भी लोग दहल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके द्वारा शिकायत किये जाने के बाद भी अब तक कोई हल नहीं निकल सका है। जिले में सैकड़ों स्टोन क्रेशर संचालित हो रहे हैं। परंतु यह विडम्बना ही कही जायेगी कि जिले के स्टोन क्रेशर का भौतिक सत्यापन नहीं किया जाता है। 
फाइलों में कैद आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि जब भी उनके द्वारा शिकायत की जाती है तो खनिज और राजस्व विभाग के अधिकारियों के द्वारा मामले की जाँच का आश्वासन तो दे दिया जाता है किन्तु रसूखदारों के आगे जाँच के आश्वासन फाइल में ही बंद रह जाते हैं। 
सुरक्षा की अनदेखी
ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी सुरक्षा इंतजामात के स्टोन क्रेशर के संचालकों के द्वारा यहाँ नियम कायदों को सरे आम ठेंगा दिखाया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्टोन क्रेशर के संचालकों के द्वारा पत्थर की खुली खदानों को तारों से कव्हर्ड न किये जाने से बारिश के बाद इसमें भरे पानी में जब तब दुर्घटनाएं होती रहती हैं। नियमानुसार पत्थर की खुदी खदान को चारों ओर से कटीले तारों से घेरा जाना चाहिये। यह भी बताया जाता है कि स्टोन क्रेशर वाले क्षेत्रों में नियमित पानी की सिंचाई भी नहीं की जाती, ताकि धूल के गुबार उठने से बचाये जा सकें। ग्रामीणों ने यह आरोप भी लगाया है कि रसूखदार स्टोन क्रेशर संचालकों के आगे नतमस्तक खनिज विभाग के द्वारा भी स्टोन क्रेशर का निरीक्षण नहीं किया जाता है। यहाँ उडऩे वाली धूल से न केवल दृश्यता कम होती है वरन यहाँ पेयजल के स्त्रोत भी प्रदूषित हो रहे हैं।
हरित क्षेत्र लापता
दरअसल सियासी नेताओं की सरपरस्ती में स्टोन क्रेशर चला रहे स्टोन क्रेशर संचालकों के द्वारा नियम कायदों को इसलिये धता बताया जाता है क्योंकि उन्हें किसी तरह की कार्यवाही का भय नहीं रह गया है। जानकार सूत्र बताते हैं कि स्टोन क्रेशर के संचालकों को नियम कायदों के अनुसार अपने-अपने स्टोन क्रेशर के पास हरित क्षेत्र विकसित करना चाहिये जिसमें पेड़ लगाये जायें। सूत्रों की मानें तो क्षेत्र में शायद ही कोई क्रेशर होगा जहाँ ग्रीन बेल्ट की स्थापना की गयी हो।
ईएमएस/चन्द्रबली सिंह / 08 दिसम्बर 2019