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शीर्ष कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड पर रोक लगाने से  किया इंकार, ईसी से दो हफ्ते में जवाब किया तलब
January 20, 2020 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY


नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने इलेक्टोरल बॉन्ड पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। शीर्ष कोर्ट ने एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि फिलहाल चुनावी बॉन्ड पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी और इस मुद्दे पर दो हफ्ते बाद अदालत फिर से सुनवाई करेगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता की ओर से प्रशांत भूषण ने कहा कि हर चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को बड़ी रकम चंदे में मिल रही है अदालत को इस पर रोक लगानी चाहिए।  प्रशांत भूषण ने अदालत मे कहा कि एसबीआई और चुनाव आयोग ने भी इसकी पुष्टि की है, हर चुनाव से पहले सरकार चुनावी बॉन्ड की योजना शुरु कर देती है। रिजर्व बैंक और चुनाव आयोग भी केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर लिख चुकी है। अब दिल्ली चुनाव से पहले भी सरकार इलेक्टोरल बॉन्ड ले कर आई है इस पर रोक लगनी चाहिए।
एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म ने अर्जी में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम 2018 पर रोक लगाने की मांग की गई है। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म ने कहा  है कि चुनावी बॉन्ड के तहत चंदा देने वाले का पहचान गोपनीय रखी जाती है। विदेशों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चंदे देने वालों की जानकारी भी नहीं मिलती राजनीतिक पार्टियां भी चंदा देने वाले का नाम सार्वजनिक नही करती है। दरअसल 12 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बांड के जरिए दिए जानेवाले चंदे पर रोक की मांग को ठुकरा दिया था। उच्चतम न्यायालय ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया था कि वे दानदाताओं की पहचान और उनके खातों में मौजूद धनराशि का ब्यौरा 30 मई तक एक सील बंद लिफाफे में चुनाव पैनल को सौंप दें। उच्चतम न्यायालय ने कहा था अगले आदेश तक चुनाव आयोग भी चुनावी बांड्स से एकत्रित की गई धनराशि का ब्यौरा सील बंद लिफाफे में ही रखे। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह कानून में किए गए बदलावों का विस्तार से परीक्षण करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि संतुलन किसी दल के पक्ष में न झुका हो। हालांकि इस दौरान चुनाव आयोग ने भी इस योजना का विरोध करते हुए कहा था कि इसमें पारदर्शिता की कमी है