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सीएए पर मुस्लिमों के भ्रम को दूर करने की तैयारी में भाजपा, रक्षामंत्री राजनाथ को सौंपी जिम्मेदारी 
January 11, 2020 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY


मेरठ । देश में विरोध के बावजूद नागरिकता संशोधन कानून के लागू करने के साथ ही आमजन खासकर मुस्लिमों को सही जानकारी देने की पहल केंद्र सरकार ने की हैं। इस मुद्दे पर बीजेपी ने यूपी में 6 रैली करने का फैसला किया है। मेरठ में वेस्ट यूपी के 14 जिलों की रैली 22 को होगी, जिन्हें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह संबोधित करने वाले है। 
रैली में बीजेपी संगठन ने पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा को बुलाने के लिए प्रस्ताव भेजा था। उम्मीद थी कि शाह और नड्डा में से कोई रैली में शिरकत करेगा, लेकिन पार्टी संगठन ने साफ कर दिया कि पीएम अपने व्यस्त प्रोग्राम के चलते नहीं आएंगे। दिल्ली चुनाव और संगठन की दूसरी व्यस्तता के कारण अब शाह और जेपी नड्डा का आना भी मुश्किल हैं। बीजेपी के वेस्ट यूपी के प्रवक्ता गजेंद्र शर्मा के मुताबिक 22 की मेरठ में प्रस्तावित रैली में अब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह आएंगे। दिल्ली रोड पर शताब्दी नगर में होने वाली रैली में वेस्ट यूपी के 14 जिलों के बीजेपी के वर्कर शिरकत करने वाले है। करीब 1 लाख लोगों को बुलाने का लक्ष्य हैं। जिले वार लक्ष्य तय कर दिया गया है। दरअसल, राजनाथ सिंह के रैली में आने के पीछे भी बीजेपी की खास रणनीति हैं।
राजनाथ का वेस्ट यूपी से खासा लगाव रहा है। राजनाथ वेस्ट यूपी के हर जिले के प्रमुख गांवों के साथ वहां के खास लोगों से व्यक्तिगत तौर पर परिचित हैं। वेस्ट यूपी के गाजियाबाद क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं। उनके बेटे पंकज सिंह नोएडा से विधायक हैं। राजनाथ सिंह के खास बीजेपी के राज्यसभा सांसद विजयपाल सिंह मेरठ के रहने वाले हैं। वह किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीजेपी में रह चुके हैं। उनका प्रभाव भी रैली में देखने को मिलेगा। नागरिकता संशोधन कानून के बारे में जागरूकता लाने, उसकी असलियत बताने, विपक्ष की बातों में नहीं आने की सलाह देने के लिए बीजेपी के मुख्य संगठन की तर्ज पर अल्पसंख्यक वर्ग में बीजेपी नेता यूपी में 6 संवाद जगह करने वाले है। इसमें मेरठ में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और अल्पसंख्यक आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष गयूर उल हसन रिजवी 14 को मेरठ में आएंगे। ऊर्दू अकादमी यूपी के सदस्य कुंनर बसित अली का कहना है कि मुस्लिमों को सीएए और एनआरसी की असलियत समझाने के लिए यह कवायद की जा रही है।