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सीबीएसई 10वीं-12वीं की परीक्षा के तरीके में बदलाव करेगा, रटने की जगह चिंतन और तर्क को बढ़ावा मिलेगा
December 2, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • देश विदेश

नई दिल्ली. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) 10वीं और 12वीं की परीक्षा के तरीके में बदलाव करेगा। मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि बोर्ड यह कदम रटने की परंपरा को खत्म करने और छात्रों में सोच और तर्क क्षमता को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाएगा। यह बदलाव 10वीं और 12वीं की 2020 में होने वाली परीक्षा के दौरान किए जाएंगे।

निशंक ने लोकसभा में सांसद केशारी देवी और चिराग पासवान के सवालों के जवाब में सीबीएसई बोर्ड के बदलाव के बारे में जानकारी दी। देशभर में सीबीएसई के कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों की कुल संख्या करीब 32 लाख है।

बिना प्रायोगिक परीक्षा वाले विषयों का आंतरिक मूल्यांकन होगा
निशंक ने बताया- प्रश्नों की संख्या घटाने, ऑब्जेक्टिव प्रश्नों की संख्या बढ़ाने, आंतरिक विकल्प के साथ-साथ हर विषय के आंतरिक मूल्यांकन जैसे बदलावों पर बोर्ड जोर देगा। सभी सवालों के 33% हिस्से में छात्रों को आंतरिक विकल्प दिया जाएगा। एक नंबर वाले ऑब्जेक्टिव प्रश्नों की संख्या प्रश्न पत्र में 25% रहेगी। हर विषय के आंतरिक मूल्यांकन के अंक 20% रहेंगे। यह वो विषय होंगे, जिनमें प्रायोगिक परीक्षा नहीं होती।