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साईं जन्मस्थान: उद्धव के बयान से बढ़ा विवाद
January 19, 2020 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY


शिरडी बंद, सड़कों पर सन्नाटा
बंद के समर्थन में 35 गांव के लोग
शिरडी । महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के साईं के जन्मस्थान को लेकर दिए गए बयान के बाद बवाल बढ़ता जा रहा है। आज शिरडी में बंद का आयोजन किया गया है, हालांकि साईं मंदिर खुला है। ऐसे में मंदिर में साईं के दर्शन के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर के बाहर अच्छी-खासी तादाद देखी जा रही है। कतार में खड़े होकर श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। शिरडी बंद के कारण सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है, दुकानें बंद हैं। इस बीच, विवाद बढ़ता देख उद्धव ठाकरे ने बातचीत की इच्छा जताई है। दरअसल यह विवाद उस समय पैदा हुआ जब उद्धव ठाकरे ने परभणी जिले के पाथरी में साईं बाबा से जुड़े स्थान पर सुविधाओं का विकास करने के लिए 100 करोड़ रुपए की राशि आवंटित करने की घोषणा की। कुछ श्रद्धालु पाथरी को साईं बाबा का जन्मस्थान मानते हैं, जबकि शिरडी के लोगों का दावा है कि उनका जन्मस्थान अज्ञात है।
बंद का भाजपा विधायक ने किया समर्थन
शिरडी स्थित श्री साईं बाबा संस्थान न्यास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक मुगलीकर ने बताया कि बंद के बावजूद मंदिर खुला रहेगा। स्थानीय बीजेपी विधायक राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि उन्होंने स्थानीय लोगों द्वारा बुलाए गए बंद का समर्थन किया है। 
बयान वापस लें सीएम
मुगलीकर ने कहा, मुख्यमंत्री को साईं बाबा का जन्मस्थान पाथरी होने संबंधी बयान को वापस लेना चाहिए। देश के कई साईं मंदिरों में एक पाथरी में भी है। सभी साईं भक्त इससे आहत हुए हैं, इसलिए इस विवाद को खत्म होना चाहिए। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने भी शुक्रवार को कहा था कि पाथरी में विकास का विरोध जन्मस्थान विवाद की वजह से नहीं किया जाना चाहिए।
क्या है विवाद?
परभणी जिले का पाथरी शिरडी से करीब 275 किलोमीटर दूर स्थित है। ठाकरे ने इसे साईं की जन्मभूमि बताया और इसके विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का ऐलान कर दिया। यूं तो साईं के जन्म को लेकर साफ-साफ जानकारी किसी को नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि वह शिरडी आकर बस गए और यहीं के होकर रह गए। इसके बाद से शिरडी की पहचान भी साईं से हो गई।
नाराज हैं शिरडी के लोग
सीएम के ऐलान के बाद शिरडी गांव के निवासी नाराज हो गए हैं। शिरडी साईं ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें पाथरी के विकास से आपत्ति नहीं है लेकिन उसे साईं की जन्मभूमि कहना ठीक नहीं है। इससे पहले भी साईं बाबा और उनके माता-पिता के बारे में कई गलत दावे किए जा चुके हैं। सीएम के बयान से लोग इतने आहत हो गए हैं कि शिरडी में बंद बुला लिया गया।

कमाई बंटने का डर
कहा जा रहा है कि साईं बाबा की जन्म स्थली पाथरी में होने के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. शिरडी साई की कर्मभूमि है और पाथरी जन्मभूमि। दोनों की अपनी-अपनी अहमियत है। शिरडी निवासी अपनी कमाई बंटने के डर से पाथरी का विरोध कर रहे हैं। ये भी सच है कि साईं भक्तों की आस्था के चलते साई ट्रस्ट दुनिया के सबसे अमीर धार्मिक ट्रस्टों में से एक है। मंदिर के चारों ओर बसे कस्बों और गावों की अर्थव्यवस्था साईं के इर्द गिर्द ही घूमती है। अगर ट्रस्ट की बीते साल की रिकॉर्डतोड़ कमाई पर नजर डालें तो 2019 में साई दरबार में 287 करोड़ का चढ़ावा आया। चढ़ावे में कैश के अलावा 19 किलो सोना और 392 किलो चांदी भी मिली। साल 2018 में 285 करोड़ का चढ़ावा आया था। वहीं मंदिर में रोजाना आने वाला औसत चढ़ावा 80 लाख रुपए है। मंदिर ट्रस्ट के पास 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा का फिक्स्ड डिपॉजिट है। जाहिर है अगर पाथरी में साईं बाबा के जन्म स्थान के नाम पर मंदिर बन गया तो देश भर से आने वाले साईं भक्तों का एक हिस्सा उधर भी सिर झुकाने पहुंचेगा और शिरडी में बरसने वाली इस दौलत पर भी असर पड़ेगा। आस्था के नाम पर छप्पर फाड़कर बरसती इसी दौलत का तकाजा है कि शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने साईं के खिलाफ धर्मयुद्ध छेड़ रखा था और उन्हें मुसलमान बताकर हिंदुओं को शिरडी से दूर रहने की नसीहत भी दे डाली थी, लेकिन आस्था तो आस्था है। एक बाार बन गई तो फिर टूटना आसान नहीं होता।