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रिहायशी इलाके में चल रही फैक्ट्री में आग, अंदर सो रहे 59 में से 44 लोगों की मौत
December 8, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • देश विदेश

नई दिल्ली. राजधानी में उपहार सिनेमा हादसे के 22 साल बाद बड़ा अग्निकांड हुआ। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से करीब 3.5 किमी दूर अनाज मंडी के रिहायशी इलाके में चल रही फैक्ट्री में रविवार तड़के 5:22 बजे आग लग गई। उस वक्त फैक्ट्री के अंदर 59 लोग सो रहे थे। इनमें से 44 लोगों की मौत हो गई, 15 जख्मी हैं। ज्यादातर मौतें दम घुटने से हुई। मृतकों में ज्यादातर मजदूर बिहार के रहने वाले थे। 4 मंजिला मकान में चल रही इस फैक्ट्री में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी थी। क्राइम ब्रांच मामले की जांच करेगा।इससे पहले 13 जून 1997 को दिल्ली के उपहार सिनेमा में लगी आग में 59 लोगों की मौत हुई थी। दिल्ली पुलिस ने फैक्ट्री मालिक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। ऐसे मामले में दोषी पाए जाने पर 10 साल जेल की सजा हो सकती है। फैक्ट्री मालिक फिलहाल फरार है। घायलों को एलएनजेपी और लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम भी भेजी गई।
फैक्ट्री में स्कूल बैग और खिलौने बनाए जाते थे। दमकल विभाग के अफसर सुनील चौधरी ने बताया कि फैक्ट्री में बैग्स, बॉटल और अन्य सामान रखा हुआ था। प्लास्टिक मटेरियल होने की वजह से धुआं ज्यादा हुआ, इसलिए दम घुटने से लोगों की जान गई। 

बिजली कंपनी ने क्या कहा 
आग बिल्डिंग के आंतरिक सिस्टम में लगी, क्योंकि मीटर पूरी तरह सुरक्षित हैं। बिल्डिंग के सामने से गुजर रहे वायर और पोल भी सुरक्षित हैं। आग बिल्डिंग की दूसरी और तीसरी मंजिल पर लगी, जबकि बिजली के मीटर ग्राउंड फ्लोर पर लगे हैं। आग अगर मीटर से लगती तो ग्राउंड फ्लोर पर लगती, न कि दूसरी और तीसरी मंजिल पर। बताया जा रहा है कि इस चि_ी में पुलिस ने घटना का ब्योरा लिखा। यह चि_ी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित उपहार सिनेमा में लगी आग में 100 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। 13 जून 1997 को जिस समय यह घटना हुई, थिएटर में बॉर्डर फिल्म चल रही थी। इसी दिन सुबह 6.55 बजे थिएटर परिसर में लगे दो ट्रांसफॉर्मरों को बिजली बोर्ड ने ठीक किया था। माना जाता है कि मरम्मत ठीक से नहीं हुई और शाम 4.55 बजे इन ट्रांसफॉर्मर में आग लग गई। इस आग ने पूरे सिनेमा हॉल को अपनी चपेट में ले लिया था।

मृतकों के परिजन को मिलेगी 18-18 लाख रु. की सहायता, केजरीवाल ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए
नई दिल्ली. रानी झांसी रोड इलाके में अनाज मंडी स्थित फैक्ट्री में आज तड़के आग लग गई। हादसे में 44 लोगों की मौत हो गई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आग को भयावह बताया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए। साथ ही मृतकों के परिजन को 10-10 लाख और घायलों को 1 रुपए सहायता देने का ऐलान किया। वहीं, मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सहायता कोष (पीएमएनआरएफ) से 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपए देने का ऐलान किया।वहीं, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मृतकों के परिजन को 5-5 लाख और घायलों को 25-25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। बिहार भवन की ओर से जान गंवाने वालों के परिवार को 1-1 लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। इनके अलावा बिहार के मृतकों के परिजनों के लिए मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने 2-2 लाख रुपए सहायता राशि देने की घोषणा की।केजरीवाल और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जांच के आदेश दिए हैं। केजरीवाल ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश देते हुए 7 दिन में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। वहीं, दिल्ली भाजपा ने आज के अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। रिहाइशी इलाके में चल रही इस फैक्ट्री में स्कूल बैग बनाए जाते हैं। दमकल विभाग के अफसर सुनील चौधरी ने बताया कि फैक्ट्री में बैग्स, बॉटल और अन्य मटैरियल रखे हुए थे। इस वजह से आग तेजी से फैली। इलाका संकीर्ण होने से रेस्क्यू में मुश्किल आई।

4 घंटे तक हॉस्पिटल पहुंचते रहे आग में झुलसे लोग

नई दिल्ली. दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में स्थित चार मंजिला बिल्डिंग में रविवार तड़के आग लगने से 44 लोगों की मौत हो गई। 14 का इलाज एलएनजेपी, आरएमएल और लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल में चल रहा है। आग की सूचना मिलने पर दमकल, एनडीआरएफ और पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। यहां से करीब 60 लोगों को निकाला गया। सबसे ज्यादा 49 घायलों को एलएनजेपी लाया गया। यहां 35 को मृत घोषित कर दिया गया। यहां के डायरेक्टर किशोर सिंह ने बताया कि ज्यादातर मौतें दम घुटने से हुईं। अन्य मरीजों के लिए इमरजेंसी सेवाएं बंद की गईं।    एलएनजेपी हॉस्पिटल में घायलों को लाने का सिलसिला 4 घंटे तक चलता रहा। एनडीआरएफ की टीमें टुकड़ों-टुकड़ों में 6 से 10 बजे तक घायलों को लाती रहीं। डॉक्टरों ने बताया कि 49 में से 34 लोगों की मौत हॉस्पिटल लाने से पहले ही हो चुकी थी। एक की मौत इलाज के दौरान हुई।    इस बीच घायलों के परिजन भी अस्पताल में जुटने लगे। उन्होंने बताया कि अस्पताल से कोई जानकारी नहीं मिल रही है और न ही अंदर घुसने दिया जा रहा है। एलएनजेपी अस्पताल में करीब 50 लोग अपने परिजन की जानकारी लेने के लिए जमा हैं। सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के करीब 100-150 जवान यहां तैनात हैं।आग में झुलसे मोहम्मद मुस्तफा ने अपने रिश्तेदार अलाउद्दीन को बताया कि 3 बजे तक तो हम फिल्म ही देख रहे थे, लेकिन 4.30 के बाद जब अचानक नींद खुली तो देखा कि आग लग चुकी थी। निकलने की जगह नहीं थी। हम लोग एक कोने वाले कमरे की ओर भागे और वहां खिड़की खोलकर सांसें लेने लगे। एक अन्य मरीज के रिश्तेदार ने बताया कि आग की सूचना मिलने पर सब भागे, भगदड़ मची और मारे गए।