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प्याज के दाम 100 रुपये किलो पहुंचे, जल्द नहीं राहत की उम्मीद
November 29, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • देश विदेश

प्याज के दाम 100 रुपये किलो पहुंचे, जल्द नहीं राहत की उम्मीद


नई दिल्ली। प्याज के दाम इस बार आसमान छू रहे हैं जिसके चलते आमजन बहुत परेशान है। इसकी कीमतों पर लगाम लगने की जल्द कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है। देश के प्रमुख शहरों में प्याज के दाम ऊंचे बने हुए हैं। गुरुवार को प्याज का औसत बिक्री मूल्य 70 रुपये किलो रहा जबकि पणजी में प्याज का अधिकतम मूल्य 110 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश के ग्वालियर में प्याज की कीमत सबसे कम यानी 38 रुपये किलो रही। व्यापारियों का कहना है कि 15 दिसंबर से पहले कीमतों में गिरावट की कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में प्याज की जमाखोरी हो रही है और ऊंचे दामों ने सरकार के भी आंसू निकाल दिए हैं। आइए जानें आखिर क्या वजह है कि इस बार प्याज 100 रुपये के पार पहुंच गया है और सरकार व प्रशासन की ओर से क्या प्रयास किए जा रहे हैं।
इस साल मॉनसून सीजन के दौरान कई राज्यों में बहुत ज्यादा बारिश हुई। इससे प्याज की फसल खराब हो गई। बारिश के कारण कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और कुछ अन्य राज्यों में फसल को 75 से 85 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा। सूत्र कहते हैं कि सरकार ने हालात को भांपने में देरी की और समय रहते प्याज के निर्यात पर रोक नहीं लगाई। इसके साथ ही उसने रबी सीजन में 500 करोड़ रुपये के ऑपरेशन ग्रीन फंड से पर्याप्त मात्रा में प्याज नहीं खरीदा। प्याज के आयात का ऑर्डर देने में भी उसने देरी की। देश में प्याज की भारी मांग की जानकारी होने के बावजूद पहले सिर्फ 4500 टन प्याज आयात किया गया। इससे बात न बनती देख अब हाल में ही एक लाख टन प्याज के आयात का ऑर्डर दिया गया है। माना जा रहा है कि यह प्याज दिसंबर के दूसरे हफ्ते तक भारत पहुंचेगा और उसके बाद हालात कुछ बेहतर होने के आसार हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में प्याज की खेती वाले प्रमुख क्षेत्रों में काफी नुकसान हुआ है। इससे प्याज की कीमतों में भारी उछाल आया है। एमएमटीसी के एक अधिकारी ने बताया, 'इन क्षेत्रों में भारी बारिश से 30 फीसदी तक फसल बर्बाद होने की खबर थी। हालांकि, इजिप्ट (मिस्र) जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक देशों से प्याज आयात का फैसला देरी से लिया गया। इससे भाव काफी बढ़ गए और स्थिति बदतर हो गई। थोक बाजार में प्याज के भाव 100 रुपये किलो चल रहे हैं। इससे जनता नाराज है। अगर अगस्त और सितंबर में ही आयात का फैसला हो जाता तो प्याज अक्टूबर में आ गया होता।' सरकार ने एमएमटीसी को 1.2 लाख टन प्याज आयात करने को कहा है।
सूरत में प्याज के दाम 100 रुपये प्रति किलो से भी ऊपर जा चुके हैं। ऐसे में चोरों की भी दिलचस्पी प्याज में बढ़ रही है। गुरुवार को सूरत में 250 किलो प्याज की चोरी हो गई, जिसकी कीमत करीब 25 हजार रुपये बताई जा रही है। जिन सब्जी विक्रेता की प्याज चोरी हुई, उन्होंने बताया कि रोज की तरह हमने दुकान के बाहर 50 किलो प्याज की पांच बोरियां रखी थीं, लेकिन हमारी नजर बचते ही चोर पांचों बोरियां चुरा ले गए। मामले की शिकायत दर्ज करा दी गई है। प्याज के बेकाबू होते दामों के आगे जनता के बाद अब सरकार भी लाचार नजर आने लगी है। प्याज की किल्लत के कारण देश के विभिन्न इलाकों में इसके रिटेल रेट 80 से 120 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं और सरकारी संस्थानों की ओर से भी अब प्याज की रियायती दामों पर बिक्री नहीं की जा रही है। इस साल खरीफ सीजन के प्याज की फसल खराब होने के कारण अब सारी उम्मीदें आयात पर टिक गई हैं। सितंबर में प्याज के खुदरा रेट 50-60 रुपये किलो के आसपास थे।