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पड़ोसी देशों के धार्मिक अल्पसंख्यकों को आश्रय देना भारत की जिम्मेदारी: माधव
December 9, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • देश विदेश


नई दिल्ली । केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर असम और पूर्वोत्तर के कई दूसरे राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच भाजपा महासचिव राम माधव ने विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि पड़ोसी देशों में रहने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए ऐसा प्रावधान किया जाना जरूरी है। भाजपा महासचिव ने कहा पड़ोसी देशों में शरणार्थी की तरह रहनेवाले ये लोग वहां पीड़ित थे। धार्मिक आधार पर उनके साथ भेदभाव किया जाता था। भारत की यह जिम्मेदारी है कि उन्हें नागरिकता दी जाए। नागरिकता संशोधन विधेयक के तहत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आनेवाले गैर-मुस्लिम लोग जो भारत में रह रहे हैं, उन्हें अवैध प्रवासी के स्थान पर भारतीय नागरिक का दर्जा दिया जाएगा। विपक्षी दलों द्वारा नागरिकता बिल का विरोध करने पर राम माधव ने पलटवार किया। उन्होंने कहा इमिग्रेंट्स एक्ट 1950 (असम से निर्वासन) में कांग्रेस शासित सरकार में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लागू किया था। 
राम माधव ने इमिग्रेंट्स एक्ट का हवाला देते हुए कहा, नागरिकता विधेयक का विरोध करनेवाले लोगों को मैं याद दिलाना चाहता हूं कि पंडित नेहरू ने भी 1950 में ऐसा ही कानून बनाया था। कानून में खास तौर पर पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) के अल्पसंख्यकों का बचाव का प्रावधान किया गया था। इस कानून के तहत पूर्वी पाकिस्तान से आनेवाले अल्पसंख्यकों को विधेयक के तहत सुरक्षा दी गई थी। यह तय किया गया था कि उनके ऊपर यह कानून लागू नहीं होगा। भाजपा महासचिव ने कहा कि भारत ने हमेशा दूसरे देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को शरण दी है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता संशोधन विधेयक के तहत भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। ये प्रवासी लोग देश को धर्म के आधार पर बांटने की ऐतिहासिक गलती का खामियाजा भुगत रहे हैं। भारत की यह जिम्मेदारी है कि वह इन अल्पसंख्यकों को आश्रय उपलब्ध कराए।