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नागरिकता संशोधन बिल को लेकर मचा बवाल
December 30, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • लेख


संसद के दोनों सदन में पारित देश में वर्तमान केन्द्र सरकार द्वारा लाया गया नागरिक संशोधन बिल को लेकर देश भर में बवाल मच गया जिसे सरकार द्वारा विपक्षी दलों का समर्थन मिला हुआ बताया जा रहा है। आखिर इस संशोधन बिल में ऐसी क्या बात है जिससे देश का मुस्लिम वर्ग आंदोलन के मार्ग पर उतर आया है। जबकि सरकार इस संशोधन बिल के बारे बार बार स्पष्टिकरण दे रही है कि इस बिल से देश में रह रहे नागरिकों पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। यह बिल किसी की नागरिकता वाविस लेने के लिये नहीं बल्कि पाक, बंगला देश एवं अफगनिस्तान देशों से मुस्लिम वर्ग को छोड़ विस्थापित हिन्दू, ,सिख , जैन एवं अन्य वर्ग से आये शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिये लाया गया है। सरकार द्वारा लाये गये इस बिल में मुस्लिम वर्ग को छोड़ देने का प्रसंग ही बवाल का कारण बन गया। जबकि सरकार द्वारा बार - बार इस बात की घोषणा की जा रही है कि इस बिल से भारत में रहे किसी भी मुस्लमान को डरने की जरूरत नहीं है। इस बिल से उन्हें किसी तरह का नुकसान पहीं होने वाला है पर देश के मुस्लिम बर्ग के समुदाय के लोगों को सरकार के इस आश्वासन पर विश्वास नहीं हो रहा है । इस बिल के विरोध में देश का सर्वाधिक मुस्लिम समुदाय आज सड़क पर उतर ही नहीं केवल आया बल्कि ओदोलन उग्र एवं हिसंक होता जा रहा है। जामिया विश्वविद्यालय से शुरू होकर आज यह आंदोलन देश के कई भागों में फैल चुका है।
विपक्षी दलों के भारी विरोध के वावयूद भी संसद के दोनों सदन में नागरिकता संशोधन बिल के पारित होते ही इसके विरोध में देश के पूर्वी क्षेत्र आसाम , मेघालय एवं बंगाल से आंदोलन शुरू हो गया जो हिंसक रूप ले लिया। संसद में विपक्षी दलों द्वारा आये सुझाव को भी सत्ता पक्ष ने बहुमत के आधार पर मानने से इंकार कर दिया। विपक्षी दलों का समर्थन इस आंदोलन के साथ होने से आंदोलन तेज होता गया। आज यह आंदोलन देश के हर भाग में फैल चुका है। जहां अधिकांश स्थानों पर हिसक घटनाएं उभरती नजर आ रही है। देश का मुस्लिम समुदाय इस बिल के विरोध में सड़क पर उतर आया है। जब कि इसी सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने पर जम्मू - कश्मीर को छोड़ देश के किसी भाग में विरोध देखने को नहीं मिला और आज नागरिकता संशोधन बिल को लेकर देश के मुस्लिम समुदाय में एक अप्रत्याशित भय समाया हुआ है जिससे यह समुदाय विरोध में सड़क पर उतर आया है।
विरोध करना एक जनतांत्रिक प्रक्रिया है पर विरोध प्रक्रिया के तहत आंदोलन को उग्र बनाना, हिंसक रूप दे देना, सरकारी सम्पति को नुकसान पहुंचाना अलोकतांत्रिक प्रक्रिया है। इस आंदोलन में ये सारी बातें उभर कर सामने आ रही है। जहां रेल पटरी उखाड़ने, बसों को जलाने, पुलिस बल पर प्रहार करने की घटना जगह - जगह उभर कर सामने आ रही है। आंदोलन का हिंसक रूप ले लेना देश हित मे कदापि नहीं हो सकता। आज यह आंदोलन सांप्रदायिकता की ओर बढ़ता नजर आ रहा है जो देश की एकता एवं संप्रभूता के लिये खतरनाक साबित हो सकता है। इस दिशा में सत्ता पक्ष एवं विपक्षी दलों को विचार करना होगा एवं मिलकर एक ऐसा मार्ग तय करना होगा जिससे देश इस तरह का महौल नहीं बने । माना कि इस समय सत्ता पक्ष के पास दोनो सदनों में बहुमत है पर विपक्ष की नजरिया को भी नकारा नहीं जाना चाहिए। संसद में विपक्ष  द्वारा बिल के संदर्भ में सारे - सारे सुझाव बहुमत के आगे गिर गये। इस बिल के खिलाफ विपक्ष न्यायालय एवं राष्ट्रपति के पास भी अपना लिोध जता चुका है। सरकार इस बिल के बारे में बार - बार कह रही है कि इस बिल से देश में रह रहे किसी भी मुसलमान कौम को कोई नुकसान नहीं होने वाला है न किसी की नागरिकता जानी है फिर देश का मुसलमान आखिर क्यों इस बिल के खिलाफ खड़ा है। कहीं इस बिल को लेकर गलत धारणा है तो दूर होनी चाहिए। बाहर से कोई भी देश के अन्दर आकर हमारी अस्मिता के लिये चुनौती बने किसी को भी स्वीकार नहीं होगा। इस तथ्य को देश के सभी राजनीतिक दलों को सोचना एवं समझना होगा तभी देश की एकता एवं संप्रभूता बनी रहेगी।