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नागरिकता बिल असंवैधानिक नहीं, बेवजह भ्रम फैला रहे विपक्षी दल : शाह
December 10, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • राजनीति


 नई दिल्ली। लोकसभा में लंबी बहस के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक आखिरकार पारित हो गया है। गृहमंत्री अमित शाह ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि बिल किसी भी तरह से संविधान विरोधी नहीं है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह बिल किसी भी तरह मुस्लिमों के खिलाफ नहीं है। यह भेदभाव खत्म करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। विपक्षी दल इसको लेकर लोगों के बीच बेवजह भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। 
संसद के निचले सदन लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने बेहद आक्रामक अंदाज में हिदुत्व का मुद्दा उठाया। उन्होंने विपक्षी दलों द्वारा मुस्लिमों के साथ किए जा रहे भेदभाव को विपक्षी दलों का  दुष्प्रचार करार देते हुए कहा कि इस विधेयक में मुस्लिम समुदाय के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया है। 
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने तर्क दिया कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता दी जा रही है, जबकि इससे मुस्लिमों को अलग रखा गया है, जो भेदभाव है। अमित शाह ने कहा बिल में जरूरी वर्गीकरण किए गए हैं। वह पूरी तरह से संविधान के दायरे में है।
गृहमंत्री अमित शाह ने पड़ोसी देशों के धार्मिक अल्पसंख्यकों को पीड़ित समुदाय बताते हुए कहा, इन तीन देशों के अल्पसंख्यक वहां पीड़ित थे और इन्हें मजबूरी में शरण के लिए आना पड़ा। इनके पास रहने के लिए कोई घर नहीं था और आम नागरिकों को मिलनेवाली कोई सुविधा नहीं थी। गृहमंत्री ने आर्टिकल 14 के उल्लंघन के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, जो लोग कह रहे हैं कि बिल आर्टिकल 14 की मूल भावना के खिलाफ है, उन्होंने अपनी ही पार्टी के द्वारा पूर्व में किए कार्यों का ठीक से अध्ययन नहीं किया है। 1947 के बाद जो भी भारत आया, उसे देश की नागरिकता दी गई, इसमें पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी जैसे लोग भी शामिल हैं।
संसद में हिंदुत्व के एजेंडे पर गृहमंत्री अमित शाह ने लगातार आक्रामक रुख अपनाए रखा। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में मुस्लिमों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया है, जैसा कि विरोधी दल साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर वोट की राजनीति कर रहे हैं। आपको याद होगा कि इससे पहले जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370 खत्म करने के फैसले का ऐलान करते हुए भी संसद में अमित शाह बेहद सख्त और आक्रामक तेवर में नजर आए थे।