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मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किया संविधान का अपमान, पद पर रहने लायक नहीं : राकेश सिंह
December 25, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • मध्य प्रदेश/उत्तर प्रदेश


भोपाल। यह लोकतंत्र के लिए शर्म की बात है कि एक संवैधानिक पद पर बैठा हुआ व्यक्ति उसी संविधान की सार्वजनिक रूप से धज्जियां उड़ा रहा है, जिसकी शपथ लेकर वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा हो। अपनी इस करतूत के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके मंत्री पद पर बने रहने के लायक नहीं रह गए हैं। उन्हें या तो तत्काल अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर देश और प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद राकेश सिंह.ने कांग्रेस के शांति मार्च बनाम विरोध जुलूस में मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा की गई सीएए  कानून को प्रदेश में लागू न किये जाने संबंधी घोषणा पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कही।
- खुद को देश के संविधान से ऊपर मानते हैं कमलनाथ
श्री सिंह ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए संसद के दोनों सदनों ने पारित किया है। इसके बाद देश के राष्ट्रपति ने इस पर हस्ताक्षर किये हैं और अब यह कानून देश के संविधान का अंग बन गया है। अब इस कानून का पालन करना किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की न सिर्फ जिम्मेदारी है, बल्कि परम कर्त्तव्य भी है। ऐसे में मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा प्रदेश में इस कानून को लागू न करने की बात कहना संविधान की सत्ता को चुनौती देने जैसा है। या फिर मुख्यमंत्री कमलनाथ खुद को संविधान से भी ऊपर मानने लगे हैं। ये दोनों ही स्थितियां संविधान का अपमान है और मुख्यमंत्री कमलनाथ तथा शांति मार्च में शामिल उनके मंत्रियों को तत्काल अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।
- सच्चाई बताई नहीं, लोगों को किया गुमराह
श्री सिंह ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शांति मार्च का नेतृत्व करने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ को पहले लोगों को इस कानून की सच्चाई बताना थी। उन्हें लोगों को यह स्पष्ट करना चाहिए था कि यह नागरिकता देने वाला कानून है, छीनने वाला नहीं। अगर उन्हें लगता है कि इस कानून से किसी को नुकसान है, तो वह क्यों और किस प्रावधान के कारण है, यह बताना चाहिए था। लेकिन मुख्यमंत्री ने यह तो किया नहीं, उल्टे लोगों को गुमराह किया और इन्हें इस कानून के खिलाफ भड़काया। उन्होंने इस कानून का विरोध करते हुए लोगों में खाई पैदा करने, उन्हें हिंदू-मुस्लिम में बांटने, सामाजिक विद्वेष पैदा करने का काम किया है। श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ जी के इस आचरण पर आज प्रदेश का हर नागरिक शर्म महसूस कर रहा है।
- मुख्यमंत्री बताएं-क्या वे हिंदू, सिख, पारसी, ईसाइयों के विरोधी हैं?
श्री सिंह.ने कहा कि वास्तव में मुख्यमंत्री कमलनाथ नागरिकता संशोधन के विरोध के माध्यम से  उन हिंदुओं, सिक्खों, पारसियों, ईसाईयों और बौद्धों का विरोध कर रहे हैं, जिनके आंसू पोंछने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने यह कानून बनाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ को यह बताना चाहिए कि उनकी इन लोगों से क्या दुश्मनी है, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अपना सब कुछ गवांकर, अपने परिजनों को खोकर, बहन-बेटियों की आबरू बचाकर किसी तरह भारत आ गए हैं। मुख्यमंत्री को यह भी बताना चाहिए कि यदि केंद्र सरकार इन्हें सम्मान के साथ भारत में जीने का हक दे रही है, तो इससे उन्हें क्या परेशानी है? श्री सिंह ने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री कमलनाथ राजनीतिक फायदे के लोभ में इतने निर्दयी हो गए हैं कि उन्हें पीड़ितों के आंसू भी दिखाई नहीं देते?
- सरकार की असफलताओं से ध्यान बंटाना चाहते हैं मुख्यमंत्री
श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने प्रदेश की जनता से धोखाधड़ी की है। यह सरकार अपना कोई वादा अब तक पूरा नहीं कर सकी है। इस सरकार ने ना तो किसानों की कर्जमाफी की, ना फसलों का बोनस दिया। किसान बाढ़ से बर्बाद हो गए, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। यह सरकार तो उन्हें फसलों की बोवनी के लिए यूरिया तक उपलब्ध नहीं करा पाई है, उल्टे किसानों को पुलिस की लाठियां खाना पड़ी हैं। प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ रही है और युवाओं से किया गया कोई वादा इस सरकार ने नहीं निभाया है। भाजपा सरकार की जनहितैषी योजनाएं इस सरकार ने बंद कर दी हैं और विकास कार्य ठप पड़े हैं। जनता को गुमराह कर सत्ता में आई कांग्रेस जनता का विश्वास खो चुकी है। ऐसे में मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने शांति मार्च के जरिए अपनी असफलता से ध्यान बंटाना चाहते थे। उनकी कोशिश यही थी कि समाज बंट जाए, प्रदेश में अशांति और अविश्वास का माहौल बन जाए, ताकि उनकी नाकामियों पर किसी का ध्यान न जाए। श्री सिंह..ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी उनकी इन कोशिशों को कभी कामयाब नहीं होने देगी और प्रदेश की जनता के सामने इस सरकार की नाकामियों को बेनकाब करेगी।
- मार्च करना ही था, तो पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए करते
प्रदेश अध्यक्ष श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेस को अगर मार्च करना ही था, तो उन लोगों को न्याय दिलाने के लिए मार्च करती जिन पर अत्याचार हुए, बलात्कार हुए, जो सब छोड़कर यहां आए हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ उनको न्याय दिलाने के लिए कहते कि सबसे पहले मध्यप्रदेश में नागरिकता देने की कानूनी औपचारिकताएं पूरी होंगी। वे उन किसानों के लिए मार्च करते जिनका कर्जामाफ नहीं हुआ। प्रदेश के उन युवाओं के लिए मार्च करते जिन्हें ना भत्ता मिला ना रोजगार। अगर वे प्रदेश की जनता से माफी मांगने के लिए मार्च करते और कहते कि हम झूठे वादे करके सत्ता में तो आ गए, परंतु हमसे सत्ता नहीं संभल रही, तो शायद प्रदेश की जनता उन्हें माफ कर देती।