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महाराष्ट्र / कैबिनेट मंत्री नहीं बनाने से नाराज राज्यमंत्री अब्दुल सत्तार ने इस्तीफा दिया, मंत्रालय बंटवारे को लेकर कांग्रेस-राकांपा में ठनी
January 4, 2020 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY

मुंबई. महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार के 30 दिसंबर 2019 को हुए 36 मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद भी अभी तक मंत्रालय का बंटवारा नहीं हो सका है। इसी बीच शनिवार को औरंगाबाद से शिवसेना के विधायक और राज्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले अब्दुल सत्तार ने मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे कैबिनेट मंत्री का पद नहीं मिलने से नाराज चल रहे थे। हालांकि, औरंगाबाद में एक होटल में अब्दुल सत्तार से मिलकर बाहर निकले शिवसेना विधायक अर्जुन खोतकर ने कहा, अब्दुल सत्तार साहब पार्टी से नाराज नहीं है। उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है। वे कल उद्धव ठाकरे साहब से मुलाकात करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, खोतकर को शिवसेना मंत्री सत्तार को मनाने का जिम्मा खुद उद्धव ठाकरे ने दिया था।

शिवसेना ने कभी बताया था दाऊद का करीबी
बता दें कि शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में 1994 में प्रकाशित अपनी एक रिपोर्ट में अब्दुल सत्तार को दाऊद का करीबी बताया था। 25 साल पुरानी सामना की यह रिपोर्ट अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और शिवसेना के नेताओं को इसका जवाब देते नहीं बन रहा है। 

11 जून 1994 को यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी

सामना ने 11 जून, 1994 को 'शेख सत्तार के दाऊद गिरोह से करीबी संबंध' शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की थी। तब अब्दुल सत्तार कांग्रेस में थे और उन्होंने शिवसेना के पार्षद को चुनाव में हराया था। सत्तार औरंगाबाद जिले के सिल्लोड क्षेत्र से विधायक हैं। यही नहीं, 1993 के मुंबई विस्फोट मामले में मौत की सजा पाए याकूब मेमन के लिए दया का अनुरोध करने वाले विधायकों में भी सत्तार शामिल थे। 

दोनों दलों के नेता बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए

अब मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर एनसीपी और कांग्रेस में अब ठन गई है। एनसीपी और शिवसेना अपने कोटे से एक भी मंत्री पद कांग्रेस से अदला-बदली करने के लिए तैयार नहीं है। एनसीपी और कांग्रेस नेताओं के बीच जारी विवाद के कारण दोनों दलों के नेता बैठक बीच में ही छोड़कर चलते बने। दोनों पार्टियों के आपसी विवाद के कारण मंत्रियों के विभागों का बंटवारा अंतिम मुकाम तक नहीं पहुंच सका।

गुरुवार की देर रात विभागों के बंटवारे को लेकर शिवसेना नेता सुभाष देसाई के सरकारी निवास पर शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की बैठक हुई थी। बैठक में अशोक चव्हाण ने ग्रामीण विकास, सहकारिता और कृषि विभाग में में से कोई एक विभाग कांग्रेस को देने की मांग रखी। चव्हाण ने शिवसेना और एनसीपी के साथ विभागों के अदला-बदली पर भी सहमति दिखाई।

अजित पवार और चव्‍हाण में तीखी बहस
सूत्रों की माने तो चव्‍हाण की मांग पर अजित पवार ने कहा कि कांग्रेस में किससे बात करें, कोई नेता ही नहीं है। इस पर अशोक चव्हाण नाराज हो गए। उन्होंने कहा- वह प्रदेश अध्यक्ष थे और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भी रहे हैं। ऐसे में उनकी बात को कैसे नकारा जा सकता है। इस पर पवार ने कहा- विभाग बंटवारे की पिछली बैठक में पृथ्वीराज चव्हाण थे, उन्होंने तो कुछ नहीं कहा, अब अशोक चव्हाण नई मांग कर रहे हैं। आखिर ऐसे कैसे चलेगा? यह बोलते हुए अजित पवार बेहद ही आक्रामक हो गए। इस पर अशोक चव्हाण ने नाराजगी व्यक्त की।