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लॉर्ड मैकाले, संघ परिवार और प्रियंका गांधी
January 8, 2020 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • लेख


लॉर्ड मैकाले ने फरवरी 1835 को ब्रिटिश संसद में अपने संबोधन में कहा था कि मैने भारत की चारों तरफ यात्रायें कीं एक छोर से दूसरे छोर तक मैने एक भी ऐसा आदमी नहीं देखा जो भीख मांगता हो या चोरी करता हो। मैने भारत भर में अपार सम्पदा देखी है, उच्चनैतिक मूल्य देखे हैं। इस योग्यता और मूल्यों वाले भारतवासियों को कभी कोई जीत नहीं सकता है यह मैं मानता हूँ। मैकाले के अनुसार जब तक हम उसकी रीढ़ न तोड़ें और भारत की ये रीढ़ है। उसकी आध्यामिक और सांस्कृतिक विरासत इसीलिये हम यहां की पुरानी शिक्षा व्यवस्था को बदलना चाहते हैं। उसकी संस्कृति भी बदलना चाहते हैं। जिससे भारतीय ये सोचें कि जो भी विदेशी हैं हमसे बेहतर हैं वो सोचने लगे कि अंग्रेजी भारतीय भाषाओं में महान हैं जिससे वो अपना आत्मसम्मान ही खो बैठेंगे। 
 लॉर्ड मैकाले ने अपने अंग्रेजी शासन को चलाने के लिये बाबुओं की भी जरूरत थी जिसके लिये अंग्रेजी जानने वाले उन्हें चाहिये थे। हमारे हुकमरानों ने आजादी के बाद से ही शिक्षा की पुरानी नीति जारी रखी जिससे विकास तो उसे पर हमारी संस्कृतिक विरासतों पर कुछ परदा जरूर पड़ गया। हम लोग संत कबीर, रहीम, जायसी जैसों की शिक्षा भूल गये। सांझी विरासतों को भूलते-भूलते हिन्दू, मुसलमान व मंदिर मस्जिद तक सोचने पर आमादा हो गये थे। सब बातें हमारे आधुनिक चतुर व धूर्त सियासतदांनों ने भी हमारे सामने परोसा, कभी भाषा के नाम पर तो कभी मज़हब के नाम पर आजादी की लड़ाई में गांधीजी के नेतृत्व में मौलाना आजाद से लेकर जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, भीमराव अम्बेडकर, जाकिर हुसैन सभी का योगदान रहा था। पर कांग्रेसियों ने नेहरू से लेकर किसी अन्य के विचारों को तरजीह ही नहीं दी 1970-80 तक कांग्रेस सिर्फ ऊँची जाति वालों के हाथों का खिलौना बनकर रह गयी। शाह बानो मुद्दे, रामजन्म भूमि मुद्दों के चलते कांग्रेस खुद उसमें दब कर आधी रह गयी, सिमट गयी फिर इन्द्रा गांधी ने इमरजेन्सी लगातार न्यायालयों व प्रेस को डराकर व राजा रानियों को कांग्रेस में घुसाकर बड़ी गलतियां कर कांग्रेस जैसी महान संस्थान को गहरी चोटें पहुंचाई गइऔ। गांधीवाद को लगभग खत्म सा कर दिया। लॉर्ड मैकाल से कम देश का नुकसान इन्द्रा जी ने नहीं किया था। अब शायद राहुल, प्रियंका गांधीवाद को कुछ हद तक बचा सकें। 
 आज की सरकार उससे भी बढ़कर बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिये सी.ए.ए. व एन.आर.सी. जैसे कानूनों की आड़ में देश की गरीब जनता को डरा रही है। उनसे नागरिकता के तमाम सबूतों को मांगा जा रहा है। देशभर में 15-20 दिनों से 1980-81 जैसा जे.पी. आंदोलन चल रहा है जिसे छात्रों का नेतृत्व पूर्व की तरह मिल रहा है। सरकार पूँजीपतियों व संघ परिवार के इशारों पर गरीबों को उनकी मेहनत से मिली कीमती जमीनें छीन कर खा जाना चाहती है। सरकार सी.ए.ए. व एन.आर.सी. का भय दिखाकर बेरोजगारों से इसकी बातें बंद कर अपने बाप दादा के नाम पते पुछवाने जा रही है। सरकार 3 करोड़ बांग्लादेशियों को भगाने के लिये 3-4 लाख करोड़ रुपये खर्च करके देश को और भी गरीब व बेरोजगार करना चाह रही है। 
अमित व प्रियंका 
 भारत सरकार के गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में जोर-जोर से चिल्ला-चिल्ला कर पूरे देश में एक एन.आर.सी. लागू करने की बात कहकर आम गरीब लोगों, रिक्शे वालों, गाड़ी वालों, गरीब खेतिहर मजदूरों को इतना डरा दिया कि उनकी नींद हराम हो गयीं। दिल्ली के जामिया विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्रों को बेवजह गंभीर मार पीट कराकर गृहमंत्री अमित शाह ने भय के वातावरण से ऊँचाई पर पहुंचा दिया। धीरे-धीरे भगवा सत्ता देश से सिमटती जा रही है। उससे भी नाराज होकर भयभीत होकर भा.ज.पा. व संघ परिवार आम गरीबों से बदला लेने पर उतारू हैं।  
 उत्तर प्रदेश में वहां के मुख्यमंत्री योगी के इशारों पर पुलिस मेहकमा आम गरीबों को गोलियां मारकर हत्यायें कर अंग्रेजी दौर की यादें याद करा रहा है। प्रियंका गांधी जैसी लोकप्रिय हस्ती को पुलिस धकया रही है, पीट रही है, पुलिस से मिलने को रोक रही है। उनके स्कूटर पर चालान तक कर रही है। ऐसा अंग्रेजी दौर में भी शायद पुलिस न करती हो। इस दौर में  उ.प्र. में सिर्फ कांग्रेसी प्रियंका के नेतृत्व में सक्रिय हैं। समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज वाले केन्द्र सरकार की सी.बी.आई. व इन्कम टैक्स तथा ई.डी. से डरकर घरों पर डरकर बैठे हैं।