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कोलकाता / मोदी बोले- आसमान में भले ही एक चांद चमकता हो, पर बांग्ला भूमि ने अनेक चंद्र दिए; मुलाकात के बाद ममता धरने पर बैठीं
January 11, 2020 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY

कोलकाता. प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को नवीनीकरण के बाद कोलकाता में 4 ऐतिहासिक इमारतों का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि यह बांग्ला भूमि की पवित्र महक को नमन करने का वक्त है। आसमान में भले ही एक चांद चमकता हो, लेकिन बंगाल ने दुनिया को सुभाष चंद्र, ईश्वर चंद्र जैसे अनेक चंद्र दिए हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मोदी से मिलीं। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी को वापस लेने की मांग की। फिर ममता तृणमूल छात्र परिषद के धरने में शामिल हुईं। मोदी 2 दिन के कोलकाता दौरे पर हैं। वे पोर्ट ट्रस्ट के 150 साल पूरे होने पर समारोह में भी शामिल होंगे।

मोदी ने कहा- ''युवा अवस्था में भी बंगाल की भूमि मुझे यहां खींच लाई थी। केंद्र की कोशिश है कि भारत के सांस्कृतिक सामर्थ्य को दुनिया के सामने रखे ताकि देश हेरिटेज टूरिज्म के रूप में उभरे। इससे रोजगार के अनेक अवसर बनेंगे। इस कार्यक्रम के बाद रवींद्र सेतु और हावड़ा ब्रिज का संरक्षण होगा। सरकार अपने अभियान में सबसे पहले कोलकाला, वाराणसी, अहमदाबाद के ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित कर रही है। इसके बाद दिल्ली, चेन्नई और हैदराबाद में मौजूद म्यूजियम का जीर्णोद्धार किया जाएगा।'' 

'बिप्लबी भारत' म्यूजियम की स्थापना की जाए: मोदी

मोदी ने कहा- कोलकाता भारत के सर्वोच्च सांस्कृतिक स्थानों में शामिल हैं। यहां की 4 ऐतिहासिक इमारतें ओल्ड करंसी बिल्डिंग, बेलवेडर हाउस, मेटकाफ हाउस और विक्टोरिया मेमोरियल हॉल संस्कृति को प्रदर्शित करती हैं। एक म्यूजियम 'बिप्लबी भारत' जरूर स्थापित होना चाहिए। जिसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस, अरबिंदो घोष, रास बिहारी बोस, खुदीराम बोस, देशबंधु, बाघा जतिन, बिनॉय, बादल, दिनेश जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों को स्थान मिलना चाहिए। नेताजी की भावनाओं का सम्मान करते हुए लालकिले में एक म्यूजियम बनाया गया। नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग भी पूरी हो रही है। 2022 में राजा राममोहन राय की 250वीं जयंती आने वाली है। बेटियों और महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए उनके प्रयासों को आगे बढ़ाना जरूरी है।

मोदी ने कहा- इतिहास में कई सेनानियों का जिक्र नहीं हुआ
प्रधानमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों के जाने के बाद देश का इतिहास लिखा गया, उसमें कई सेनानियों को नजरअंदाज कर दिया गया। भाई-भाई को मारता रहा, हत्याएं होती रहीं। ये हमारा इतिहास नहीं है। ये किसी ने नहीं बताया कि तब हम क्या कर रहे थे। गुरुदेव लिखते हैं कि बाहर से आए इतिहासकारों ने उन लोगों के घरों को नहीं देखा, जो संकट का सामना कर रहे थे। इतिहास में इन्हें जगह नहीं दी गई। जैसा गुरुदेव ने कहा था कि अस्थिरता के दौर में, उसका सामना करना, राष्ट्रीय चेतना को जागृत रखना और उसे अगली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी तो एक कर्तव्य था। यह कार्य हमारी कला, संतों और हमारे दार्शनिकों ने किया।

बंगाल के महापुरुषों ने संस्कृति को जीवित रखा

डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कहा था कि इस देश की संस्कृति के मूल्यों को जीवित रखा जाए। बांग्ला भूमि में पैदा हुए संतों, महापुरुषों ने इसे संरक्षित किया है। आसमान में भले ही एक चांद चमकता हो, लेकिन बंगाल ने दुनिया को अनेक चंद्र दिए हैं। सुभाष चंद्र, ईश्वर चंद्र और शरत चंद्र। हम सभी को स्वामी विवेकानंद जी की वो बात याद रखना चाहिए, जो उन्होंने मिशिगन यूनिवर्सिटी में कहा था कि 21वीं सदी भारत की होगी। युवाओं को इसे याद रखना चाहिए।

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की

शनिवार को उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। इसके बाद ममता ने बताया कि प्रधानमंत्री से कहा है कि हम नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ हैं। हम चाहते हैं कि सीएए और एनआरसी को वापस लिया जाए। इसके बाद शाम को मुख्यमंत्री तृणमूल छात्र परिषद के धरने में शामिल हुईं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल ने सीएए के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है।