ALL उर्जाधानी देश विदेश राजनीति मध्य प्रदेश/उत्तर प्रदेश मनोरंजन साहित्य लेख
किसानों से प्रतिशोध ले रहे हैं शिवराज - जीतू पटवारी 
December 7, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • मध्य प्रदेश/उत्तर प्रदेश


शिवराज की निराशा - अभद्र-अमर्यादित भाषा
भोपाल। जीतू पटवारी, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री, मप्र शासन ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को पत्र लिख कर कहा कि सत्ता जाने की निराशा आज-कल आपके वक्तव्यों में अधिक दिखाई देने लगी है, साथ ही आप प्रदेश की जनता और आपके राजनैतिक दल में अप्रासंगिक भी हो गये हैं, शायद इसीलिए अब आपको भाषा की मर्यादा का भान भी नहीं रहता। हॉल ही में मुख्यमंत्री कमलनाथ के संदर्भ में आपने जिस प्रकार 'खेत की मूली' जैसी अभद्र भाषा का प्रयोग किया है, उससे एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि आपकी सत्ता लोलुपता का स्तर क्या हो गया है। 
शिवराज जी, पहले तो आपकी सत्ता की सरपरस्ती में फसलों के दाम मांगने पर आपने अन्नदाता किसानों के सीने में गोलियां उतार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया और जब सत्ता चली गई तो किसानों से प्रतिशोध की आग में आप जल रहे हैं और लगातार उनकी आजीविका पर आक्रमण कर रहे हैं। 
शिवराज जी, प्रदेश की जनता और अन्नदाता किसानों के कुछ ज्वलंत प्रश्न हैं, जिनका उत्तर हर हाल में आपको देना चाहिए:- 
1. क्या यह सही नहीं है कि मप्र में कांग्रेस की सरकार बनते ही आपने प्रदेश के किसानों के साथ छल करते हुए रबी सीजन 2018-19 में दिसम्बर माह के 3 लाख 70 हजार मैट्रिक टन यूरिया के केंद्रीय आवंटन को कम कराया और मात्र 1 लाख 65 हजार मैट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति की गई? तब तत्काल मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने तीन दिन दिल्ली रूककर यूरिया की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करायी।
2. क्या यह सही नहीं है कि किसानों की आजीविका के साथ आपने और केंद्र सरकार ने कुठाराघात किया और रबी सीजन 2019-20 में राज्य सरकार द्वारा केंद्र से 18 लाख मीट्रिक टन यूरिया की मांग के एवज में केंद्र ने 15 लाख 40 हजार मीट्रिक टन ही स्वीकृत किया? तथा अक्टूबर माह में स्वीकृति के अनुसार 4 लाख 25 हजार मीट्रिक टन के एवज में मात्र 2 लाख 98 हजार मीट्रिक टन दिया? नवम्बर माह में 4 लाख 50 हजार मीट्रिक टन की स्वीकृति की तुलना में 4 लाख मीट्रिक टन दिया ? वर्तमान दिसम्बर माह की 4.25 लाख मीट्रिक टन की स्वीकृति में अब तक जो रैक पहुंच चुकी है और रास्त में है, कुल मिलाकर 50 हजार मीट्रिक टन दिया है।
3. शिवराज जी, क्या आपने प्रदेश जब अतिवृष्टि और बाढ़ से पीड़ित था तब भी प्रदेश के नागरिकों और किसानों के साथ धोखा नहीं किया? केंद्र से मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने 6621.28 करोड़ रूपये राहत राशि की मांग की थी, मगर केंद्र ने लंबे अंतराल के बाद मात्र 1000 करोड़ रूपये ही दिये। प्रदेश के नागरिकों के साथ किये गये इस छल में क्या आप शामिल नहीं थे? 
4. क्या केंद्र सरकार से आपने फसल बीमा योजना का खरीफ 2019 का केंद्रांश नहीं रूकवाया? प्रदेश सरकार ने राज्य का हिस्सा 509.60 करोड़ रूपये खरीफ 2019 का देने के बावजूद केंद्र ने यह कहा कि पूर्व की सरकार ने चूंकि पुराना 2300 करोड़ रूपये जमा नहीं कराये हैं, इसलिए इस बार का केंद्रांश नहीं दे सकते। क्या आपने आपकी सरकार के रहते भी किसानों के साथ फसल बीमा के नाम पर धोखा नहीं किया? 
5. क्या यह सही नहीं है कि खरीफ 2017 के भावांतर के 576 करोड़ रूपये, खरीफ 2018 के 321 करोड़ रूपये और अतिरिक्त 6 लाख मैट्रिक टन के 120 करोड़ रूपये अर्थात कुल 1017 करोड़ रूपये केंद्र से अब तक नहीं रूकवा रखे हैं?
6. क्या यह सही नहीं है कि वर्ष 2018-19 में केंद्र प्रायोजित योजना का 6547 करोड़ रूपये आपने केंद्र से नहीं रूकवाया?