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कमल नाथ के दिशा-निर्देश में अनुसूचित जाति वर्ग के सामाजिक-आर्थिक हित हो रहे हैं सुरक्षित
January 4, 2020 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • लेख


किसी प्रदेश और देश की समृद्धि तभी संभव है जब वहां के सभी वर्ग, जाति व समुदाय का समुचित और समावेशी विकास हो l  कमल नाथ ने जब से मुख्यमंत्री  पद की शपथ ग्रहण की ,तभी से प्रदेश के सभी वर्ग और समुदायों  को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिये संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रहे है। उन्होंने मंत्रिमडल के सहयोगियों और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि प्रदेश की जनता के लिये वे सहज उपलब्ध रहें । प्रदेश में निवास करने वाली सभी जाति और समुदाय के उत्थान को लेकर मुख्यमंत्री कमल नाथ की सोच और दृष्टि बहुत ही स्पष्ट है। उनके नेतृत्व में हर वर्ग के लिये कल्याणकारी योजनाएं और कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। प्रदेश के अंतिम छोर में खड़े वर्ग को भी कमल नाथ आगे लाने के लिये वचनबद्ध हैं। इन्हीं वर्ग में अनुसूचित जाति के लोग भी आते हैं, जिनको आगे बढ़ाने के लिये प्रदेश सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
जनगणना 2011 के आंकड़ों का अध्ययन करने पर हम पाते हैं कि मध्यप्रदेश में कुल 113.42 लाख लोग अनुसूचित जाति के हैं। प्रदेश की कुल आबादी का यह 15.6 प्रतिशत हिस्सा हैं। प्रदेश में अनुसूचित जातियों की कुल संख्या 48 है। अनुसूचित जातियां हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को आवास, शिक्षा, सुरक्षा और रोज़गार दिलाने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। इस वर्ग के छात्रों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने के लिए प्रदेश के कई स्थानों पर आवासीय विद्यालय खोले गये हैं। इसके साथ ही सरकार द्वारा ऐसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
 बीते एक साल में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के 1 लाख रुपये तक के ऋण माफ किये गये। वर्ष 2013 से मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति सलाहकार मण्डल की बैठक आयोजित नहीं हुई थी, जिसे मुख्यमंत्री के निर्देश में तत्काल प्रभाव से आयोजित कराया गया। भारत सरकार द्वारा विशेष केन्द्रीय सहायता के अंतर्गत अनुसूचित जाति उपयोजना मद में प्राप्त होने वाली राशि में पहली बार अनुसूचित जाति बस्तियों में अधोसंरचना विकास के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया, जिसे भारत सरकार द्वारा स्वीकार किया गया। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना का क्रियान्वयन और बेहतर ढंग से हो सके इसलिये इसे ग्रामीण विकास विभाग से हस्तांतरित कर अनुसूचित जाति विकास विभाग को सौंपा गया। अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 980 से अधिक जोड़ों को 19.61 करोड़ की राशि वितरित की गई।
बच्चों को मिल रही विदेश में शिक्षा
कमल नाथ सरकार को जोर इस बात पर है कि हर वर्ग के बच्चों को ने केवल बेहतर शिक्षा मिले, बल्कि कौशलयुक्त शिक्षा मिले ताकि युवाओं को रोज़गार आसानी से मिले सके। इसलिये अनुसूचित जाति के बच्चों को गुणवत्तायुक्त बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिये पिछले एक वर्ष में अनुसूचित जाति पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 3,46,044 विद्यार्थियों को लगभग 348 करोड़ की राशि का भुगतान किया गया। इस योजना अंतर्गत विस्तारित आय सीमा का क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया गया है ।
घर से दूर रहकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के बेहतर आवास और शिक्षा मिल सके इसके लिये विभाग द्वारा संचालित 1,917 छात्रावासों में लगभग 95,000 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया। विभाग में संचालित आवासीय शिक्षण संस्थाओं और रविदास स्मारक के 23 भवनों के निर्माण पर लगभग 12 करोड़ रुपये का व्यय किया गया। वहीं 10 ज्ञानोदय आवासीय विद्यालयों में 3,886 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया। बच्चों को किस स्तर से पढ़ाया गया इसका अंदाजा परिणाम देखकर लगाया जा  सकता हैl इन विद्यालयों की कक्षा 10वीं एवं 12वीं का परीक्षा परिणाम क्रमशः 99.74 प्रतिशत एवं 96.95 प्रतिशत रहा। विद्यार्थी आवास सहायता योजना में 64,365 विद्यार्थियों को 91 करोड़ 42लाख  रुपये की आवास सहायता राशि का भुगतान किया गया। अनुसूचित जाति के छात्रावासों और आश्रमों में रहने वाले विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति में वृद्धि की है। वर्ष 2019-20 में अब छात्रों के लिए 1230 रुपये और छात्राओं के लिए 1270 रुपये की प्रतिमाह शिष्यवृत्ति देय होगी, जबकि वर्ष 2018 में छात्रों को 1140 और छात्राओं को 1180 रुपये शिष्यवृत्ति दी जा रही थी।
अनुसूचित जाति के बच्चे भी विदेश जाकर चिंतामुक्त होकर पढ़ाई कर सकें इसके लिये विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना में संशोधन प्रस्तावित किये गये। विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति के अंतर्गत अनुसूचित जाति के 47 अभ्यर्थियों का चयन किया गया। वर्तमान में 36 विद्यार्थी विदेश में अध्ययन कर रहे हैं। इस योजना में पिछले एक वर्ष में 6.68 करोड़ रुपये शिक्षण शुल्क एवं अन्य शुल्कों का भुगतान किया गया है।
कोचिंग में न आये कोई बाधा इसलिये सरकार ने बढ़ाया हाथ
विभिन्न आई.आई.टी., एन.आई.टी. और एन.एल.आई.यू. आदि प्रतिष्ठित संस्थाओं में प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से प्रवेश लेने वाले 15 छात्र-छात्राओं को महर्षि वाल्मिकी प्रोत्साहन योजना में 4.75 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई। अनुसूचित जाति के बच्चों की प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी बेहतर तरीके से हो सके इसलिये यू.पी.एस.सी. परीक्षाओं की तैयारी के लिए नई दिल्ली के प्रतिष्ठित संस्थाओं में कोचिंग हेतु गत एक वर्ष में 100 अभ्यार्थियों को चयनित कर दिल्ली भेजा गया। परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्रों में प्रवेश लेने वाले 1025 विद्यार्थियों में से 84 विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित हुए और लगभग 1000 अभ्यर्थी अभी भी कोचिंग ले रहे हैं।
स्वरोज़गार और उद्यम के लिये मिल रही है अनुदान सहायता
प्रदेश के मुखिया ने छिंदवाड़ा को एक नई पहचान दी है आज छिंदवाड़ा मॉडल पूरे प्रदेश और देश में जाना जाता है। छिंदवाड़ा में सबसे से ज्यादा स्किल डेवलपमेंट सेंटर हैं जिसका परिणाम है कि वहां से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को शत-प्रतिशत रोज़गार मिलता है। मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन प्रशिक्षण योजना में अनुसूचित वर्ग के 3465 प्रशिक्षणार्थियों को विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षित कर 1323 प्रशिणार्थियों को नियोजित कराया गया। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में 93 समूहों को 32.57 करोड़ रुपये ऋण एवं अनुदान सहायता राशि उपलब्ध कराई गयी। वहीं मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना में 333 हितग्राहियों को 13.2 करोड़ रूपये ऋण एवं अनुदान सहायता राशि उपलब्ध कराई गयी। जबकि मुख्यमंत्री स्वरोज़गार योजना के अंतर्गत 4250 युवकों के स्वरोज़गार प्रकरणों में 190.67 करोड़ रुपये का ऋण एवं अनुदान सहायता राशि उपलब्ध कराई गयी।
महिला समूहों को बनाया सशक्त, बस्ती का किया विकास
मुख्यमंत्री कमल नाथ अनुसूचित जाति के हर वर्ग का उत्थान कर रहे हैं, पिछले एक वर्ष में मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना में 2486 प्रकरणों में स्वरोज़गार स्थापित करने के लिए 14.57 करोड़ रुपये का अनुदान वितरित किया गया। जबकि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये सावित्री बाई फुले स्व-सहायता योजना में 138 महिला समूहों को 4.50 करोड़ रुपये का ऋण एवं सहायता राशि उपलब्ध कराई गयी। वहीं अनुसूचित जाति बस्ती विकास योजना में 644 कार्य स्वीकृत किये गये, जिन पर 44.22 करोड़ रुपये व्यय किये गये। अनुसूचित जाति के कृषकों के कुंओं तक विद्युत लाइन का विस्तार योजना (पंप ऊर्जीकरण) में 363 हितग्राहियों के सिंचाई स्त्रोत तक विद्युत लाइन का विस्तार 17.41 करोड़ रुपये का खर्च किए गए। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में प्रदेश के 400 अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्रामों के सर्वांगीण विकास हेतु योजना क्रियान्वित की गयी। इस योजना में 70 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इस तरह समग्र आंकड़ों को देखे तो स्पष्ट रूप से पुष्टि होती है कि पिछले एक साल में कमल नाथ सरकार ने अनुसूचित वर्ग के कल्याण और उत्थान के लिये कई अहम कार्य किये हैं।