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गरीब मरीजों के इलाज में भी हो गया घोटाला
December 13, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • मध्य प्रदेश/उत्तर प्रदेश


मरीज का इलाज हुआ नहीं, सरकार के खाते से निकल गई रकम
भोपाल। महाकौशल समेत आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के साथ इलाज के नाम पर बड़ा घोटाला  सामने आया है। सरकार द्वारा गरीब मरीजों के इलाज के लिए दी जाने वाली सहायता राशि का फायदा अस्पताल उठा रहे है। यह सब जिन मरीजों के नाम पर हो रहा है उन्हें क्या बीमारी थी, क्या उपचार किया गया इसका कुछ पता नहीं। ऐसा ही एक मामला जब सामने आया तो प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। 
इस पूरे घोटाले का केंद्र बिंदू नागपुर का एक निजी अस्पताल है। इस अस्पताल का नाम मेडिट्रिना इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंस बताया जा रहा है। अस्पताल और अधिकारियों के बीच सांठगांठ का खेल पिछली भाजपा सरकार में 2015 से 2017 के बीच हुआ।  बताया जाता है कि अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों के इलाज के नाम पर सरकार से करोड़ों रुपये अपने खाते में जमा करा लिया। जबकि मरीज वहां इलाज कराने पहुंचे ही नहीं। इस मामले की जानकारी जब कमलनाथ सरकार तक पहुंची तो उसने अस्पताल को ब्लैकलिस्ट कर दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पूरा मामला ऐसे ही चलता रहता अगर अस्पताल के पार्टनर डॉक्टर गणेश चक्करवार ने सामने आकर पूरे मामले की पोल नहीं खोली होती। डॉक्टर चक्करवार का कहना है कि अस्पताल ने इस तरह का घपला दूसरे राज्यों में भी किया है। मामले का खुलासा होने के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है दोषियों पर कार्रवाई कर पैसे की वसूली की जाएंगी। 
- इन बीमारियों के नाम पर ली राशि
अस्पताल ने सरकार से जिन बीमारियों के नाम पर खजाना भरा है उनमें कार्डियोलॉजी एंड सर्जरी, न्यूरों एवं स्पाईन सर्जरी, ज्वाइंट रिपलेसमेंट, ऑर्थोपेडिक सर्जरी के साथ ट्रामा और क्रिटिकल केयर शामिल है। 
- अस्पताल ने इस तरह किया गोरखधंधा
अस्पताल प्रबंधन मरीजों और सरकारी खजाने को लूटने के लिए पूरी योजनाबद्ध तरीके से काम करता था। वह महाराष्ट्र से सटे मध्यप्रदेश के जिलों में कैंप लगाता था यहां ग्रामीणों का चेकअप करने के नाम पर कई दस्तावेजों पर साईन करा लिये जाते थे। इसके बाद मरीज को भर्ती किए बिना ही स्वास्थ्य विभाग से उसके नाम पर राज्य बीमारी सहायता निधि मंजूर करा ली जाती थी। जांच में ऐसे मामले भी सामने आए है जब बीपीएल और राज्य बीमारी सहायता निधि दोनों में एक मरीज के नाम पर राशि निकलवा ली गई।