ALL उर्जाधानी देश विदेश राजनीति मध्य प्रदेश/उत्तर प्रदेश मनोरंजन साहित्य लेख
द्विपक्षीय संबंध / मोदी ने कहा- श्रीलंका की अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए 2865 करोड़ रु के कर्ज की सुविधा देंगे
November 29, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • देश विदेश

 

नई दिल्ली.  श्रीलंका के राष्ट्रपति गौतबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बैठक की। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त बयान में कहा कि श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए 2865 करोड़ रुपए (400 मिलियन डॉलर) के कर्ज की सुविधा (लाइन ऑफ क्रेडिट) दी जाएगी। 716 करोड़ रु. (100 मिलियन डॉलर) का कर्ज सोलर परियोजना पर खर्च करने लिए दिए जाएंगे।

मोदी ने कहा- भारतीय आवास परियोजना के तहत श्रीलंका में पहले ही 46 हजार घरों का निर्माण किया जा चुका है। तमिल मूल के लोगों के लिए 14 हजार घरों का निर्माण जारी है। श्रीलंका के साथ संबंध मजबूत करने के लिए हमने अपने विचार साझा किए। राष्ट्रपति राजपक्षे ने मुझसे कहा कि उनका राजनीतिक दृष्टिकोण विभिन्न समुदाय के बीच सौहार्द बनाए रखने का है। मुझे उम्मीद है कि श्रीलंका की सरकार तमिलों की समानता, न्याय और सम्मान की दिशा में काम करेगी।

'नेवरहुड फर्स्ट पॉलिसी' के तहत श्रीलंका प्राथमिकता पर: मोदी

उन्होंने कहा- आपको (गौतबाया राजपक्षे) श्रीलंका की जनता की ओर से बहुमत मिला। यह दर्शाता है कि वह एक मजबूत श्रीलंका देखना चाहते हैं। यह न सिर्फ भारत के हित में है बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र के लिए अहम है। मोदी ने कहा, “भारत और श्रीलंका ने एक मजबूत संबंध साझा किया है। 'नेवरहुड फर्स्ट पॉलिसी' के तहत श्रीलंका को हम अपने संबंधों में प्राथमिकता पर रखते हैं। भारत हमेशा आतंकवाद के खिलाफ लड़ता रहा है। हम श्रीलंका को आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए 358 करोड़ रु. (50 मिलियन डॉलर) की मदद देंगे।”

भारतीय मछुआरों के नौकाओं को जल्द छोड़ेंगे: राजपक्षे
श्रीलंका के राष्ट्रपति राजपक्षे ने कहा, “भारत ने श्रीलंका द्वारा नौकाओं को रखे जाने का मुद्दा उठाया। हम अपने हिरासत में रखे गए नौकाओं को जल्द छोड़ने को लेकर काम करेंगे।” श्रीलंका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति गौतबाया राजपक्षे तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं। शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत हुआ। गौतबाया ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इससे पहले गौतबाया ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। राष्ट्रपति बनने के बाद गौतबाया की यह पहली विदेश यात्रा है।

गौतबाया राजपक्षे ने 18 नवंबर को राष्ट्रपति शपथ ली थी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आमंत्रण पर श्रीलंका के राष्ट्रपति का दौरा, इससे दोनों देशों के संबंधों को गति मिलेगी। गौतबाया के कार्यभार ग्रहण करने के बाद पिछले हफ्ते विदेश मंत्री एस जयशंकर उनसे मिलने वाले पहले विदेशी नेता थे। इसी महीने हुए राष्ट्रपति चुनाव में गौतबाया ने जीत हासिल की थी। उन्होंने 18 नवंबर को शपथ ली थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें जीत की बधाई और भारत आने का न्यौता दिया था।

दिल्ली में एमडीएमके नेता वाइको और समर्थकों का प्रदर्शन

  • गौतबाया की यात्रा के विरोध में मारूमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) के नेता वाइको ने गुरुवार को दिल्ली में समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया। इसके बाद पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन ले गई। 
  • माना जाता है कि गौतबाया चीन के समर्थक हैं। हालांकि, उन्होंने पिछले दिनों कहा था कि चीन को हम्बनटोटा बंदरगाह को 99 साल के लीज पर दिया जाना पूर्ववर्ती सरकार की गलती थी। इस समझौते पर फिर से बातचीत चल रही है।

हिंद महासागर में कब्जा जमाना चाहता है चीन
चीन के 7 जंगी जहाज जियान-32 सितंबर में हिंद महासागर में श्रीलंका के पास नजर आए थे। इन्हें भारतीय नौसेना के टोही विमानों पी-8आई ने ट्रैक किया था और तस्वीरें लीं थीं। सूत्रों के मुताबिक, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के नियंत्रण वाली नेवी का मुख्य मकसद हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी ताकत दिखाना है। वे (चीन) यहां अपना प्रभाव इसलिए भी कायम रखना चाहते हैं, क्योंकि ज्यादातर समुद्री व्यापार इसी इलाके से होता है।

चीन के कर्ज में डूबा श्रीलंका
श्रीलंका की छवि एक ऐसे देश के तौर पर बनी है जो चीन के कर्ज में डूबता जा रहा है। श्रीलंका ने हंबनटोटा बंदरगाह के निर्माण के लिए 2007 से 2016 के बीच एक्जिम बैंक से कई बार कर्ज लिया। श्रीलंका अपने विदेशी कर्ज के भुगतान में उचित संतुलन नहीं बना पा रहा था और न ही वहां भारी मात्रा में विदेशी निवेश हो रहा था। इस कारण श्रीलंका कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं था। ऐसे में उसने चीन की मर्चेंट पोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड कंपनी को बंदरगाह 99 साल के लीज पर देने का फैसला किया। श्रीलंका ने हंबनटोटा का अधिकार चीन को 1.12 बिलियन डॉलर (करीब 8 हजार करोड़ रुपए) के बदले सौंपा।