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दिल्ली की गुड़िया / 5 साल की बच्ची के 2 दुष्कर्मी दोषी करार, कोर्ट ने कहा- बच्ची ने जो हैवानियत सही, उसने समाज की अंतरआत्मा को झकझोर दिया
January 18, 2020 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY

नई दिल्ली. 2013 में दिल्ली के गांधीनगर में पांच साल की बच्ची (प्रतीकात्मक नाम गुड़िया) के अपहरण और गैंग रेप के मामले में दिल्ली कोर्ट ने शनिवार को दो आरोपियों मनोज और प्रदीप को दोषी करार दिया। अदालत ने कहा- यह बेहद गंभीर मामला है। बच्ची ने जो हैवानियत सही, उसने समाज की अंतरआत्मा को झकझोर दिया। हम छोटी बच्चियों को देवी की तरह पूजते हैं, लेकिन दुष्कर्मियों ने क्रूरता की हदें पार कर दीं। अदालत ने दोनों को अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार दिया। 30 जनवरी को इनकी सजा पर सुनवाई होगी।

पूर्वी दिल्ली के गांधीनगर में 15 अप्रैल, 2013 को दो दोषियों मनोज और प्रदीप ने पड़ोस में रहने वाली पांच साल की बच्ची का अपहरण किया था। दोनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और उसके प्राइवेट अंगों में मोमबत्ती और बोतल जैसी चीजें डाल दी थीं। इसके बाद वे बच्ची को मृत समझकर भाग गए थे। बेहोश बच्ची दो दिनों (करीब 40 घंटे) तक दोषी के कमरे में ही पड़ी रही थी और 17 अप्रैल को पुलिस ने उसे गंभीर हालत में एम्स में भर्ती कराया था। इस वारदात के बाद मीडिया ने बच्ची को गुड़िया नाम दिया था। बच्ची का परिवार और दोषी एक ही इमारत में किराए पर रहते थे।

पिता ने कहा- बच्ची को इंसाफ मिला

फैसले के बाद बच्ची के पिता ने कहा कि इस मामले में फैसला बहुत देरी से आया। हालांकि उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि 6 साल बाद ही सही, उनकी बेटी को आखिरकार इंसाफ मिल गया। वहीं परिवार के वकील ने कहा- इस केस को अंजाम तक पहुंचाने में डीएनए सबूतों की अहम भूमिका रही। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि हैवानियत झेलने वाली बच्ची जिंदा है। हम इस बात से बेहद खुश हैं।

बच्ची बेहोशी की हालत में मिली थी 
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था। दोषी मनोज कुमार को पुलिस ने बिहार में उसकी ससुराल से गिरफ्तार किया था। उसने बच्ची को दो दिन तक बंधक बनाने की बात कबूली थी। दूसरे दोषी प्रदीप की गिरफ्तारी बाद में हुई थी।

30 जनवरी को अदालत सजा सुनाएगी

मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जस्टिस नरेश कुमार मलहोत्रा ने मनोज और प्रदीप को अपहरण (धारा 363), अपराध की नीयत से बंधक बनाना (धारा 342), हत्या का प्रयास (धारा 307), सबूत नष्ट करना (धारा 201), बलात्कार (धारा 376), अप्राकृतिक कृत्य (धारा 377) और लैंगिक हिंसा से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी करार दिया। अदालत 30 दोनों दोषियों की सजा पर सुनवाई करेगी।