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भारत बंद / प्रदर्शनकारियों ने बंगाल में पुलिस पर बम फेंका, वाहन जलाए; केरल में नोबेल विजेता की हाउसबोट रोकी गई
January 8, 2020 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY

लखनऊ/ भोपाल/ जालंधर. केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में वाम समर्थित 10 ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का मिला-जुला असर देखने को मिला। पश्चिम बंगाल के मालदा में पुलिस और हड़ताल समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। केरल के अलापुझा में हड़ताल कर रहे लोगों ने नोबेल पुरस्कार विजेता माइकल लेविट और उनकी पत्नी को लेकर जा रही हाउसबोट को रोक दिया। हालांकि बाद में उन्हें जाने दिया गया। देश के कई राज्यों में ट्रेड यूनियनों ने रैली और सभाएं कीं। पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और लेफ्ट शासित केरल में बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ा। हालांकि दिल्ली समेत उत्तर भारत में हड़ताल का ज्यादा असर नहीं देखा गया।

श्रमिक संगठनों की तरफ बुधवार की हड़ताल में 25 करोड़ लोगों के शामिल होने का दावा किया गया था। हड़ताल को भारतीय व्यापार संघ, ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर, हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), स्व-रोजगार महिला संघ, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन शामिल हैं। इसके अलावा (एलपीएफ), यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू), इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी) और ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर ने समर्थन दिया।

केरल: नोबेल विजेता और उनकी पत्नी 2 घंटे तक फंसे रहे
केरल में प्रदर्शनकारियों ने राज्य अतिथि की हैसियत से पहुंचे नोबेल पुरस्कार विजेता माइकल लेविट और उनकी पत्नी को लेकर जा रही हाउसबोट को रोक दिया। करीब 2 घंटे के बाद उनकी नाव को आगे जाने दिया गया। लेविट को 2013 में रसायन शास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला था। इस घटना के बाद राज्य के पर्यटन मंत्री कडकमपल्ली सुरेंद्रन ने कहा, “हम बोट का रास्ता रोकने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।” तिरुवनंतपुरम में भी ट्रेड यूनियनों ने रैली निकाली।

पश्चिम बंगाल: कई जगह प्रदर्शन, हिंसा और झड़प
पश्चिम बंगाल के मालदा में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। हालात संभालने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। सुजापुर में सड़क बंद कर रहे हड़ताल समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया। कलियाचक में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बम फेंका और एक वाहन को आग लगा दी। राज्य में रोडवेज की दो बसों को भी जला दिया गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वाम दलों को इसका जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “सीपीआईएम की कोई विचारधारा नहीं है। रेलवे ट्रेक पर बम रखना 'गुंडागर्दी' है और आंदोलन के नाम पर यात्रियों को पीटना या पथराव करना 'दादागीरी' है। यह आंदोलन नहीं है, मैं इसकी निंदा करती हूं।”

मुंबई: शिवसेना ने भारत बंद को समर्थन दिया। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ने लिखा, भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल ने उद्योग और कर्मचारी वर्ग को खासा नुकसान पहुंचाया है। इसका कारण सरकार के नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसले रहे हैं। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कर्मचारियों ने विनिवेश के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया।

दिल्ली: राहुल गांधी का ट्वीट-  मोदी-शाह सरकार की जन-विरोधी नीतियों ने विनाशकारी बेरोजगारी को बढ़ावा देकर हमारे सार्वजनिक उपक्रमों को कमजोर किया है। आज 25 करोड़ कर्मचारी हड़ताल पर हैं। मैं उन सभी को सलाम करता हूं।

पटना: राजेंद्र नगर टर्मिनल पर ट्रेन रोकने पहुंचे आईसा सदस्यों की रेलवे पुलिस से झड़प हुई। पुलिस ने जब इन्हें प्लेटफॉर्म पर जाने से रोका, तो बंद समर्थकों ने जवानों के हथियार छीनने की कोशिश की।

उत्तर प्रदेश: पब्लिक सेक्टर बैंकों, बीएसएनएल, डाक और एलआईसी समेत कई दफ्तरों में कामकाज पर असर पड़ा। अखिल भारतीय राज्य सरकार कर्मचारी महासंघ और महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ ने भी हड़ताल का समर्थन किया।

पंजाब: जालंधर में वाम संगठनों ने इंडस्ट्रियल एरिया फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन की रोड ब्लॉक की। भारतीय जीवन बीमा निगम कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। अमृतसर में कुछ रेलें रोकी गईं।

हरियाणा: अलग-अलग डिपो में हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। सरकारी बसों के संचालन पर भी असर पड़ा।

तमिलनाडु: चेन्नई में माउंट रोड पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।

कर्मचारियों की ये थी मांगें

  • सभी के लिए न्यूनतम वेतन 21 हजार प्रति माह से कम न हो और इसे मूल्य सूचकांक से जोड़ा जाए 
  • स्थायी/ बाहर मासी कामों के लिए ठेका प्रथा बंद हो। ठेका / संविदा / आउटसोर्सिंग कर्मचारी, जो नियमित कर्मचारी का कार्य कर रहे हैं उन्हें नियमित किया जाए। जब तक उन्हें नियमित नहीं किया जाता नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन भत्ता दिया जाए। 
  • बोनस और और प्रोविडेंट फंड की अदायगी पर से सभी बाध्‍यता सीमा हटायी जाए। ग्रेच्‍युटी का भुगतान 45 दिन प्रतिवर्ष के हिसाब से किया जाए।
  • सबके लिए पेंशन सुनिश्चित किया जाए। ईपीएफओ द्वारा सभी को एक हजार की जगह कम से कम दस हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाए। 
  • केंद्रिय राज्‍य सरकार के कर्मचारियों की पुरानी पेंशन नीति को बहाल किया जाए। केंद्र व राज्‍य कर्मचारियों को एक समान वेतन व भत्‍ते दिए जाए। 
  • रोजगार सृजन के लिए ठोस कदम उठाया जाए। केंद्र व राज्‍य सरकार के रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती किया जाए। नियमित प्रकृति के कार्यों में कार्यरत सभी उद्योग के संविदा आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित किया जाए और कार्य के आधार पर आवश्यकतानुसार नई भर्ती की जाए, ताकि बेरोजगारी दूर हो। स्थाई प्रकृति के काम पर स्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए। 
  • महंगाई पर रोक लगाने के लिए योजना बनाई जाए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाए एवं खाद्य पदार्थों पर वायदा कारोबार पर रोक लगाई जाए। 
  • श्रम कानून को सख्ती से लागू किया जाए। श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधनों को वापस किया जाए असंगठित क्षेत्र के लिए क्या मजदूरों के लिए क्षेत्र के मजदूरों के लिए सर्वव्यापी सर्वव्यापी सामाजिक सुरक्षा कानून बनाया जाए एवं राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कोष का निर्माण किया जाए।

249 किसान संगठन और 80 विद्यार्थी संगठनों का बंद को समर्थन

हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, ओड़िशा, तेलंगाना, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और आंध्रप्रदेश में भी मजदूर संगठनों ने धरना-प्रदर्शन और सभाएं करके विरोध जताया। कई शहरों में यातायात, बिजली और बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ा। पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और लेफ्ट शासित केरल में बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ा। हालांकि दिल्ली समेत उत्तर भारत में हड़ताल का ज्यादा असर नहीं देखा गया। किसानों के मुताबिक, देशभर में 249 किसान संगठन और 80 विद्यार्थी संगठनों ने इस बंद को समर्थन दिया। ऑल इंडिया संघर्ष कमेटी की घोषणा के मुताबिक गांवों से दूध, सब्जी-फल की सप्लाई प्रभावित हुई। मध्य प्रदेश में सेंट्रल बैंक ने एसएमएस भेज कर ग्राहकों को हड़ताल की जानकारी दी। उप्र में जेईई मेन 2020, यूपी टीईटी 2019 और आईसीएआर नेट 2020 प्रवेश परीक्षाएं भी प्रभावित हुईं।