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भाजपा विधायक नारे लगाते विधानसभा पहुंचे
December 18, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • मध्य प्रदेश/उत्तर प्रदेश

 


२३ हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश 
-अनुपूरक बजट पर चर्चा गुरुवार  को होगी, ये प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट है 
- पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने एमसीयू का मुद्दा शून्यकाल के दौरान उठाया 
भोपाल। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन वित्तमंत्री वित्तमंत्री तरुण भनोत ने २०१९-२० का पहला २३ हजार करोड़ रुपये अनुपूरक बजट पेश किया। यह अभी तक का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट है। अनुपूरक बजट पर चर्चा गुरुवार को होगी। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायक एवं पूर्व मुख्यमत्री शिवराज सिंह ने एमसीयू का मुद्दा उठाया।  
सत्र का आज दूसरा दिन था।  प्रदेश में यूरिया की कमी को लेकर भाजपा विधायक बिड़ला मंदिर से एकत्रित होकर मार्च के रूप में विधानसभा पहुंचे।  कमलनाथ सरकार द्वारा २०१९-२० का पहला अनुपूरक बजट पेश हुआ है।  
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही शून्यकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से निष्कासित छात्रों का मामला उठाया। शिवराज ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ आतंकवादियों की तरह व्यवहार हुआ है। छात्रों का निष्कासन तुरंत रद्द होना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा- मामले की उच्च स्तरीय जांच समिति से कराई जाए।  
होशंगाबाद में अधिकारियों के बीच विवाद विधानसभा में उठा 
विधानसभा में आज सरकार ने स्वीकार किया कि होशंगाबाद जिला कलेक्टर और एक अनुविभागीय दंडाधिकारी के बीच विवाद संबंधी मामले की जांच नर्मदापुरम संभाग आयुक्त  द्वारा की गयी थी। सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने भाजपा के डॉ. सीतासरन शर्मा के लिखित सवाल के जवाब में बताया, जांच इसी वर्ष अक्टूबर माह में की गयी थी।  आयुक्त के जांच प्रतिवेदन में घटनाक्रम से संबंधित परिस्थितियों की वस्तुस्थिति का उल्लेख है। मंत्री ने कहा कि तत्कालीन कलेक्टर और अनुविभागीय दंडाधिकारी का प्रशासनिक कारणों से अन्यत्र स्थानांतरण किया जा चुका है।  
प्रजापति ने दी मंत्री तोमर को चेतावनी 
 अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने प्रश्नकाल के दौरान व्यवधान उत्पन्न करने के कारण खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को चेतावनी दी। प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री मेधावी छात्रवृत्ति योजना को लेकर पूरक प्रश्र किए। इसी दौरान तोमर अपने स्थान पर खड़े होकर बोलने लगे। अध्यक्ष ने मंत्री से शांत रहने के लिए कहा। बार-बार अनुरोध के बावजूद मंत्री शांत नहीं हुए। इस पर अध्यक्ष ने तोमर को चेतावनी देते हुए कहा कि उनके चेहरे और भाषा के जो भाव हैं, वह उचित नहीं हैं। यह सदन है, कोई सभा नहीं है।  
एक साल में लगभग १९ हजार करोड़  रुपयों का ऋण लिया 
विधानसभा में वित्त मंत्री तरुण भनोत ने बताया कि राज्य सरकार ने एक वर्ष के दौरान अठारह हजार आठ सौ दस करोड़ रुपयों का ऋण लिया है।  भाजपा सदस्य भूपेंद्र सिंह के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने दिसंबर २०१८ से ०४ दिसंबर २०१९ तक २१ बार में कुल १८ हजार आठ सौ दस करोड़ रुपयों का बाजार से ऋण लिया है। बाजार ऋण के अतिरिक्त अन्य ऋणों के संबंध में महालेखाकार से अंकेक्षित आंकड़े प्राप्त नहीं हुए हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि किसान कर्जमाफी सहित सभी योजनाओं के लिए बजट प्रावधान वर्ष २०१९-२० के बजट में किया गया है। फसल ऋण माफी योजना के लिए ८००० करोड़ रुपयों का प्रावधान है।   
किसान कर्जमाफी को लेकर भाजपा का बहिर्गमन 
- विधानसभा में किसान कर्जमाफी के मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल और विपक्षी सदस्यों के बीच नोकझोंक की स्थिति के बीच भाजपा के सदस्यों ने सरकार के उत्तर पर असंतोष व्यक्त करते हुए बहिर्गमन किया। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा के विश्वास सारंग ने होशंगाबाद जिले में किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया, कि सरकार ने वादे के अनुसार किसानों के कर्ज माफ नहीं किए हैं। सहकारिता मंत्री डॉ गोविंद सिंह ने कहा कि सरकार ने किसानों के कर्ज चरणबद्व रुप से माफ किए जा रहे हैं। अभी किसानों के 50 हजार तक के ऋण माफ हुए हैं। आज से 1 लाख तक के ऋण माफ करने की प्रक्रिया शुरु हो गई है। शेष किसानों के कर्ज भी माफ किए जाएंगे।  
-इस बात को लेकर विपक्षी दल के सदस्य एकसाथ बोलने लगे। वहीं सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने भी विपक्षी दल के सदस्यों की बातों का प्रतिकार किया। दोनों पक्षों के सदस्यों के एकसाथ बोलने पर सदन में शोरगुल बढ़ गया। जिसके कारण सदन की कार्यवाही में हंगामा होता रहा। 
-अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने सदस्यों को किसी तरह शांत कराया। इसके बाद मंत्री डॉ. सिंह ने विस्तार से उत्तर देना प्रारंभ किया।  
सात दिन के सत्र में  २१२५ प्रश्न 
सात दिन के विधानसभा सत्र में २१२५ लिखित प्रश्नों के माध्यम से विधायकों द्वारा विभिन्न मुद्दे उठाए गए हैं। विधानसभा सचिवालय को अभी तक शासकीय विधेयकों की पांच सूचनाएं पहुंची हैं, ३०० ध्यानाकर्षण, २० स्थगन प्रस्ताव, २२ अशासकीय संकल्प, ९३ शून्यकाल की सूचनायें सचिवालय को प्राप्त हुई है।