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बच्चों का बचपन बचाना समाज का कर्तव्य  : राज्यपाल श्री टंडन
December 1, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • मध्य प्रदेश/उत्तर प्रदेश


भोपाल। राज्यपाल लाल जी टंडन ने कहा है कि बच्चों को उन्मुक्त होकर उड़ने का आनंदमय वातावरण उपलब्ध कराना समाज की जिम्मेदारी। उन्होंने कहा है कि बच्चों को भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों की जानकारी परंपरागत किस्से कहानी के द्वारा दी जानी चाहिए। श्री टंडन आज राजभवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल श्री टंडन ने कहा कि बच्चों का बचपन उनका प्राकृतिक अधिकार है। नवजात बच्चा भी किलकारी मार कर और हाथ पैर चला कर खेल का आनंद प्राप्त करता है। आज के यांत्रिक जीवन में उनका बचपन का आनंद खो रहा है। जो वह जीवन के साथ लेकर आता है। बच्चों का बचपन बचाना समाज के हर सदस्य का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की शिक्षा प्रणाली में बच्‍चों को उनके बचपन को बनाये रखते हुए किस्से कहानियों में जीवन की शिक्षा दी जाती थी। पचतंत्र जैसी अनेक पुस्तके थी जिनमें खेल-खेल में नीति उपदेश के बड़ी-बड़ी बाते सरलता से समझा दी जाती थी जो जीवनभर उनका मार्गदर्शन करती थी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर सांदीपनि जैसे महान गुरू हुए है, जिन्हे 24 कलाओं की विशेषज्ञता थी। जहाँ राजसी परिवार और निर्धन परिवार के सदस्य समान रूप से शिक्षा प्राप्त करते थे। सामाजिक विषमताओं के भेद-भाव के बिना, सभी बच्चों को आनंदमय वातावरण में शिक्षा मिलती थी। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता उन्हीं के आश्रम हुई थी।
श्री टंडन ने कहा कि जिज्ञासा बच्चों का स्वाभाविक गुण है शिक्षा ऐसी हो जो उनकी प्रयोगधर्मिता को प्रोत्साहित करें। उन्होंने बिना साधन के इच्छा शक्ति के बल पर समाज को श्रेष्ठ व्यक्ति बनने की कहानी सुना कर बच्चों को प्रेरित किया। उनको आनंद के वातावरण में चर्चा के लिए प्रोत्साहित किया। राज्यपाल सहित सभी बच्चों ने खुले मन से उन्मुक्त हँसी सांझा की। राज्यपाल ने कहा कि बच्चों को सहयोग देना हम सबका दायित्व है। यह नये समाज के निर्माण की जिम्मेदारी है। ठीक उसी तरह जैसे पौधे को लगाते समय कुछ विशेष देख-रेख की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों के दृष्टिकोण में भी नये चिंतन का समावेश किया जाना चाहिए। बच्चों को प्रकृति के साक्षात्कार के अवसर दिये जाने चाहिए। पारंपरिक खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक क्रिकेट का खेल और प्राचीन गुल्ली-डंडा के खेल का सैद्धांतिक आधार एक ही है। खेल के लिए संसाधनों की आवश्यकता में बहुत अन्तर है। इसी तरह राष्ट्रीयता और राष्ट्र प्रेम की सर्वोच्चता के कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। ऐसे कार्यक्रम असमानता और विषमताओं को समाप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान साहित्य के अध्ययन और उसकी जानकारी को प्रसारित करने के कार्य किए जाने चाहिए। देश की भावी पीढ़ी को भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं का ज्ञान भी कराया जाना चाहिए। कार्यक्रम के प्रारम्भ में नवदुनिया के स्थानीय सम्पादक श्री सुदेश गौड़ ने कार्यक्रम नन्ही खुशियाँ  की रूप रेखा पर प्रकाश डाला, कार्यक्रम का संचालन राजेश गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में गरीब बस्तियों के बच्चों ने राज्यपाल से भेंट की। उनके साथ अनौपचारिक आनंद के पल बिताएं। फोटो खिंचवा कर स्मृतियों को सुरक्षित किया। इस अवसर पर बच्चों ने राजभवन में स्वल्पाहार प्राप्त किया और राजभवन का भ्रमण किया।