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अर्थव्यवस्था / प्रधानमंत्री जब 40 अर्थशास्त्रियों से बजट पर चर्चा कर रहे थे, वित्त मंत्री तब भाजपा कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं की मीटिंग ले रही थीं
January 9, 2020 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नीति आयोग में 40 से ज्यादा अर्थशास्त्रियों और इंडस्ट्री के विशेषज्ञों के साथ 2 घंटे तक बैठक की। मोदी का फोकस 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी के लक्ष्य पर था। उन्होंने खपत और मांग बढ़ाने के उपायों पर सुझाव मांगे। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद थे, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की गैर-मौजूदगी चौंकाने वाली थी। जब देश के प्रमुख अर्थशास्त्री इकोनॉमी और बजट पर चर्चा कर रहे थे, तब वित्त मंत्री भाजपा मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बजट पूर्व चर्चा कर रही थीं। 

बजट से पहले मोदी की 13वीं बैठक

  1.  

    बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार, सीईओ अमिताभ कांत और दूसरे अधिकारियों के साथ अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और ग्रोथ बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई। इस दौरान कृषि और इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ दूसरे सेक्टर के मुद्दे रखे गए। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देबरॉय भी मीटिंग में शामिल थे। बजट से पहले अर्थव्यवस्था पर चर्चा के लिए यह मोदी की 13वीं बैठक थी। इसमें वित्त मंत्री की गैर-मौजूदगी पर सोशल मीडिया यूजर ने सवाल उठाए, लेकिन वित्त मंत्री भाजपा मुख्यालय पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ प्री-बजट मीटिंग कर रही थीं। मोदी पहली बार वित्त मंत्री की बैठकों से अलग मुलाकातें कर रहे हैं। 

     

  2.  

    सरकार बजट की प्रक्रिया में जुटी है, लेकिन जीडीपी ग्रोथ में गिरावट की वजह से चिंतित है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक मोदी इस बार बजट की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर प्रधानमंत्री की सक्रियता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने प्रमुख उद्योगपतियों के साथ पिछले दिनों दो बैठकें की थीं। इनके अलावा अलग-अलग इंडस्ट्री के लोगों के साथ 10 मीटिंग कर चुके। सभी मंत्रालयों को भी 5 साल की योजना का खाका तैयार करने को कहा गया है। इनकी समीक्षा के लिए भी मोदी काफी समय दे रहे हैं।

     

  3. जीडीपी ग्रोथ 11 साल में सबसे कम रहने का अनुमान

     

    एक फरवरी को आने वाले आम बजट के लिए प्रधानमंत्री ने जनता से भी सुझाव भी मांगे हैं। वे जानना चाहते हैं कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए बजट में क्या उपाय किए जा सकते हैं। जीडीपी ग्रोथ 11 साल के निचले स्तर पर पहुंचने के जोखिम के बीच है। केंद्रीय सांख्यिकी विभाग ने 2019-20 में ग्रोथ सिर्फ 5% रहने का अनुमान जताया है। ऐसा हुआ तो यह 2008-09 के बाद सबसे कम ग्रोथ होगी।

     

  4. मोदी सरकार में सब कुछ ठीक नहीं!

     

    वित्त मंत्रालय के एक सूत्र का कहना है कि सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कुछ अहम मंत्रियों पर गाज गिर सकती है। हालांकि, 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट से पहले कुछ कहना जल्दबाजी होगी। संसद के बजट सत्र का पहला चरण 31 जनवरी से 11 फरवरी के बीच चलेगा। दूसरा चरण 2 मार्च से शुरू होगा और 3 अप्रैल तक चलेगा। लिहाजा, मोदी सरकार-2 का मई में पहला साल पूरा होने से पहले बदलाव के आसार नहीं हैं।

     

  5.  

    सीतारमण की गुरुवार को भाजपा कार्यकाल में मौजूदगी पर पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि हमने वित्त मंत्री के सामने बजट से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट पेश की। पार्टी ने डेढ़ महीने में यह रिपोर्ट तैयार की थी। हालांकि, अग्रवाल ने मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों पर कोई टिप्पणी नहीं की।

     

  6. कांग्रेस ने कहा- अगली बार वित्त मंत्री को भी बुलाना

     

    कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधते हुए गुरुवार को ट्वीट किया कि एक सुझाव है। अगली बजट मीटिंग में वित्त मंत्री को बुलाने पर जरूर विचार करना।