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'आयुष्मान' योजना के तहत फिर शुरु होगा मुफ्त इलाज
December 12, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • मध्य प्रदेश/उत्तर प्रदेश


हमीदिया में बंद कर दी थी सीटी स्कैन और एमआरआई जांच  
भोपाल । 'आयुष्मान भारत' योजना के तहत प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से संबद्घ अस्पतालों में मरीजों का ओपीडी में मुफ्त इलाज फिर शुरू होगा।राजधानी के हमीदिया अस्पताल में 19 नवंबर से ओपीडी में आने वाले आयुष्मान योजना के मरीजों की निःशुल्क सीटी स्कैन और एमआरआई जांच बंद कर दी गई थी। इस बारे में आयुक्त चिकित्सा शिक्षा निशांत वरवडे ने आदेश जारी कर दिए हैं। आयुष्मान योजना के तहत चिन्हित परिवार के मरीजों का हर साल 5 लाख रुपए तक का तय अस्पतालों में निःशुल्क इलाज किया जाता है। योजना में सिर्फ भर्ती मरीजों का निःशुल्क किया जाता है। 19 नवंबर को हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव ने आदेश जारी कर ओपीडी में आने वाले मरीजों का निःशुल्क इलाज बंद करने कहा था। इसके पीछे उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग में आला अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देश का हवाला दिया था। इसके बाद से मरीजों को आयुष्मान कार्ड होने पर भी ओपीडी में दिखाने के बाद सीटी-एमआरआई जांच के पैसे देने पड़ रहे थे। पैसे नहीं होने पर कई गरीब मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ रहा था। 
 19 नवंबर के पहले तक आयुष्मान पात्रों के अलावा कैंसर, एचआईवी, इमरजेंसी, लावारिस मरीजों की बिना भर्ती हुए भी सभी जांचें निःशुल्क हो रही थीं। यह बाद में बंद कर दी गईं। आयुक्त के निर्देश के बाद अब इनकी जांचें भी फिर से निःशुल्क हो सकेंगी। उधर, अधीक्षक डॉ. श्रीवास्तव ने 3 दिन पहले एक आदेश जारी कर कहा था कि भर्ती व ओपीडी में से किसी भी मरीज से जांच व दवाओं के पैसे फिलहाल नहीं लिए जाएं।  उधर ओपीडी में मरीजों की सभी जांचें मुफ्त करने को लेकर आयुष्मान भारत योजना के सीईओ डॉ. जे विजय कुमार ने कहा कि योजना के तहत सिर्फ भर्ती मरीजों का इलाज किया जाता है। ऐसे में मेडिकल कॉलेजों के संबद्घ अस्पतालों में ओपीडी में इन मरीजों का इलाज किया जाता है तो इसका क्लेम योजना के तहत नहीं दिया जा सकता। ऐसे में यह खर्च सरकार या फिर कॉलेजों की स्वशासी समिति को उठाना पड़ेगा। बता दें कि गैर आयुष्मान मरीजों से शासन ने जांच, दवाओं व अन्य सेवाओं के लिए शुल्क लेने की तैयारी की है। इस गफलत में कई विभागों ने अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले गैर आयुष्मान मरीजों से शुल्क लेना शुरू कर दिया था।