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आरबीआई / जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.1% से घटाकर 5%, रेपो रेट लगातार 5 बार घटाने के बाद इस बार 5.15% पर स्थिर
December 5, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • देश विदेश

मुंबई. आरबीआई ने इस बार उम्मीदों के विपरीत रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। यानी लोन अभी और सस्ते नहीं होंगे। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सभी 6 सदस्यों ने ब्याज दरें स्थिर रखने के पक्ष में वोट दिया। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान घटाकर 5% कर दिया है। पिछला अनुमान 6.1% का था। आरबीआई ने मौद्रिक नीति समीक्षा के लिए तीन दिन चली बैठक के बाद गुरुवार को फैसलों की जानकारी दी। 

मौद्रिक नीति को लेकर अकोमोडेटिव नजरिया बरकरार 
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि ब्याज दरों को स्थिर रखना अस्थाई कदम है। हम देखता चाहते हैं कि रेपो रेट में अब तक की गई 1.35% कटौती का कितना असर हुआ। अर्थव्यवस्था के लिए जब तक जरूरी होगा मौद्रिक नीति को लेकर अकोमोडेटिव आउटलुक रखा जाएगा। इसका मतलब ये हुआ कि रेपो रेट में आगे कटौती संभव है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की अगली बैठक 4-6 फरवरी को होगी। आखिरी दिन फैसलों का ऐलान किया जाएगा।

महंगाई दर का अनुमान बढ़ाया

आरबीआई ने दूसरी छमाही (अक्टूबर-मार्च) में रिटेल महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.7-5.1% किया है। पिछली बार 3.5% से 3.7% का अनुमान था। अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर 4.6% पहुंच गई। यह आरबीआई के अनुमान से काफी ज्यादा है। इसलिए आरबीआई ने दूसरी छमाही में महंगाई दर का अनुमान बढ़ाया है।

रेपो रेट में 0.25% कटौती की उम्मीद थी

पिछली 5 बैठकों में आरबीआई ने रेपो रेट में हर बार कमी करते हुए कुल 1.35% कटौती की थी। अर्थशास्त्री इस बार भी 0.25% कटौती की उम्मीद कर रहे थे। माना जा रहा था कि आर्थिक विकास दर को रफ्तार देने के लिए आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) रेपो रेट में और कटौती का फैसला ले सकती है। जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ सिर्फ 4.5% रह गई। यह पिछले 6 साल में सबसे कम है।

आरबीआई ने अब तक रेपो रेट जितना घटाया बैंकों ने ग्राहकों को उतना फायदा नहीं दिया। इसलिए केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर से ब्याज दरों को रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जोड़ना अनिवार्य किया था। एसबीआई समेत प्रमुख बैंकों ने ब्याज दरों को रेपो रेट से लिंक करने का विकल्प चुना था।