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आंतक को लेकर पाकिस्तान कभी नहीं सुधरने वाला हैं, इस कारण चौकन्ना रहना जरुरी : राजनाथ सिंह 
December 7, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • देश विदेश


देहरादून। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को अपनी स्टेट पॉलिसी बना चुका हैं वहां कभी नहीं बदलेगा। यह बात रक्षा मंत्री इंडियन मिलिट्री अकैडमी में 142वीं पासिंग आउट परेड में कार्यक्रम के दौरान कही। सिंह ने पासिंग आउट कैडेट्स से कहा,पाकिस्तान ने आतंकवाद को अपनी स्टेट पॉलिसी बना लिया है। वे चार जंग लड़ चुके हैं और पाकिस्तान सभी जंग हार चुका हैं। लेकिन वह अजीब पड़ोसी हैं और अपने तरीके नहीं बदल रहे हैं। इसकारण आपकों आतंकवाद का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।'
सिंह ने कहा,कई युद्धों में भारत के हाथों शिकस्त खाने के बावजूद पाकिस्तान आतंकवाद को सरकारी नीति पर चलता है। पाकिस्तान में चरमंपथी तत्व इतने मजबूत हैं कि राजनीति के केंद्र में बैठे लोग उनके हाथों की कठपुतलियों से ज्यादा कुछ नहीं लगते। उन्होंने कहा,इतिहास गवाह है कि भारत की अतिरिक्त क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं नहीं रही हैं। वह अपने पड़ोसी के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों में यकीन रखता है लेकिन हमें पाकिस्तान जैसे पड़ोसी से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।'
9/11 और 26/11 के सरगनों के पाकिस्तान में पाए जाने का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, '26/11 के दोषियों को तब न्याय मिलेगा जब आतंक के सरगनाओं को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत और चीन की क्षेत्रीय अवधारणाएं एक-दूसरे से अलग हो सकती हैं, लेकिन चीन आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बाकी दुनिया के साथ खड़ा है। उन्होंने चीन के साथ डोकलाम गतिरोध के दौरान संयम के साथ-साथ इच्छाशक्ति दिखाने के लिए भी भारतीय सुरक्षा बल की प्रशंसा की।
कैडेटों को बधाई देते हुए राजनाथ ने कहा,आपके प्रशिक्षण ने न केवल आपको शक्ति दी है बल्कि आपके जीवन को भी नया अर्थ दिया है। रक्षामंत्री ने इलाके में यातायात की भीड़भाड़ को कम करने के लिए आईएमए के उत्तर, दक्षिण और मध्य परिसरों को जोड़ने के लिए दो अंडरपास के निर्माण की भी घोषणा की। सिंह ने कहा कि इन परियोजनाओं के लिए 30 करोड़ की मंजूरी दी गई है। रक्षामंत्री ने अकादमी का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और स्वर्ण पदक अकैडमी अंडर ऑफिसर विनय विलास गराद को और रजत पदक सीनियर अंडर ऑफिसर पीकेंद्र सिंह और कांस्य पदक बटालियन अंडर ऑफिसर ध्रुव मेहला को दिया।