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2 सीटें जीत येदियुरप्पा ने बड़ी बाधा पार कर ली पर मंत्रिमंडल में संतुलन बैठाना होगी चुनौती?
December 11, 2019 • R. K. SRIVASTAVA / NIRAJ PANDEY • राजनीति


बेंगलुरु । कर्नाटक में हालही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 15 में से 12 सीटें जीत यहां के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की सरकार मजबूत हो गई, लेकिन उन्हें एक और मुश्किल का अभी सामना करना पड़ सकता है। मुख्यमंत्री के तौर पर येदियुरप्पा को भाजपा के नए निवार्चित विधायकों को शामिल करने के लिए मंत्रिमंडल का विस्तार करना है लेकिन इसे लेकर उन्हें पार्टी के अंदर नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। येदियुरप्पा ने चार महीने पहले जब मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी तो उन्होंने मंत्रिमंडल में 34 में से 17 पदों को खाली रखा था। उन्होंने बाकी के पद उपचुनाव में जीत हासिल करने वाले अयोग्य विधायकों से भरने के लिए खाली छोड़े थे। इनमें से 11 विधानसभा में वापस आ गए हैं। भाजपा के सूत्रों ने बताया कि मंत्रिमंडल में जाति और धर्म के लिहाज से संतुलन बनाना 76 वर्षीय येदियुरप्पा के लिए एक बड़ा सिर दर्द होगा। उदाहरण के लिए, येदियुरप्पा के मंत्रिमंडल में पहले ही चार मंत्री बेंगलुरु शहर से और दो बेलगावी जिले से हैं। अब बेंगलुरु से चार और विधायक जीते हैं और तीन ने बेलगावी जिले में जीत हासिल की है। अयोग्य विधायकों को दिए गए येदियुरप्पा के आश्वासन के अनुसार, ये सातों विधायक नए मंत्रिमंडल का हिस्सा होंगे। इससे बेंगलुरु से मंत्रियों की संख्या आठ और बेलगावी से पांच हो जाएगी। इसके राज्य के अन्य जिलों के मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व पर असर पड़ेगा।
जाति के लिहाज से भी मंत्रिमंडल में पहले ही दबदबे वाले लिंगायत समुदाय से सात और वोकालिगा और अनुसूचित जाति प्रत्येक से तीन मंत्री हैं। चार और लिंगायत विधायकों के उपचुनाव जीतने से मुख्यमंत्री के लिए इन्हें मंत्रिमंडल में जगह देना मुश्किल हो जाएगा। भाजपा के कुछ नेताओं ने संकेत दिया कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व येदियुरप्पा के मौजूदा मंत्रिमंडल से कुछ मंत्रियों को हटाने का फैसला कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषक संदीप शास्त्री ने कहा, 'नए चुने गए विधायक बड़े पोर्टफोलियो मिलने की उम्मीद करेंगे। अगर येदियुरप्पा ऐसे कुछ पोर्टफोलियो उन्हें देते हैं तो पार्टी में नाराजगी सामने आ जाएगी। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का रवैया कैसा रहता है।' राजनीतिक जानकारों का कहना है कि येदियुरप्पा को राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के साथ ही मतदाताओं से किए गए चुनावी वादों को पूरा करने के दबाव का सामना भी करना होगा। राजनीति विश्लेषक हरीश रामास्वामी ने कहा, 'येदियुरप्पा की सरकार के पिछले चार महीने कुछ खास नहीं रहे हैं। अब उन्हें राज्य के लिए विशेष योजनाएं बनाने के साथ ही बाढ़ पीड़ितों को भी राहत देने पर विचार करना होगा।' हालांकि, बीजेपी के बहुत से नेताओं को विश्वास है कि येदियुरप्पा इन मुश्किलों से निकलने में सफल रहेंगे और उनके नेतृत्व में कर्नाटक की सरकार मजबूती से चलेगी। 
विपिन/ ईएमएस/ 11 दिसंबर 2019